सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर में दवाओं को पचास प्रतिशत कम दाम पर उपलब्ध कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की तर्ज पर सरकार की ओर से दवाएं और सर्जिकल उपकरण 50 प्रतिशत कम दाम पर लोगों को उपलब्ध कराने का आदेश जारी करने का आग्रह किया गया है।
जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने कोलकाता निवासी अविशेक गोयनका की ओर से दायर याचिका को सुनवाई के लिए अनुमति प्रदान करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि बड़ी कंपनियां और खुदरा व्यापारी अपनी जेबों को भरने के लिए महंगे दाम पर लोगों को दवाएं बेचते हैं। इसके चलते लोगों से अनुचित तरीके से पैसा वसूला जा रहा है।
पीठ के समक्ष पेश हुए गोयनका ने कहा कि देश में बड़े स्तर पर बीमारियां फैलती हैं और इनकी रोकथाम के लिए देशभर के तमाम लोग असमर्थ हैं क्योंकि नागरिकों को दवाइयां और सर्जिकल उपकरण बहुत ही महंगे मिलते हैं। ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है कि लोगों को कम दाम पर दवाएं मिलें जबकि इन पर 50 प्रतिशत से अधिक तक की छूट भी कंपनियां प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि एम्स ने एक मॉडल तैयार कर लागू किया है, जिसके तहत दवाएं और सर्जिकल सामग्री व अन्य अधिकतम खुदरा मूल्य से 56 प्रतिशत छूट पर लोगों को प्राप्त होते हैं। ऐसी व्यवस्था सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त अस्पतालों में उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
पीठ ने याचिकाकर्ता के तर्क से सहमति जताते हुए केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यदि दवाओं और सर्जिकल उपकरणों में लोगों को 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है तो इससे उनके चिकित्सा खर्च में भारी कमी आएगी। इससे देशभर के आम आदमी को बड़ा लाभ मिलेगा।