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फिर टल सकता है दवाओं की बार कोडिंग का मामला

Wed, 12 Dec 2012 10:27 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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नकली दवाओं के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए पैकेजिंग पर बार कोडिंग का मामला एक बार फिर टल सकता है। केंद्र सरकार की ओर से आगामी एक जनवरी से निर्यात होने वाली दवाओं के सेकेंडरी स्तर की पैकिंग पर बार कोडिंग लागू करने का निर्देश जारी हो चुका है, लेकिन उद्योग जगत फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है।
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इस मुद्दे पर मंगलवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ दवा निर्माताओं और निर्यातकों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार बार कोडिंग लागू करने के एवज में दवा कंपनियों और निर्यातकों को कुछ प्रोत्साहन देने को तैयार है। इसके बावजूद दवा उद्योग सेकेंडरी पैकिंग पर एक जनवरी से बार कोडिंग लागू करने की स्थिति में नहीं है।

फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मएक्सेल) के महानिदेशक डॉ. पीवी अप्पाजी का कहना है कि परिषद ने बार कोडिंग से जुड़े कई सुझाव सरकार को दिए हैं, जिन पर वह विचार करने का तैयार है। उद्योग जगत की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया है।
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टरशरी पैकिंग पर बार कोडिंग पिछले एक साल से लागू है। सेकेंडरी पैकिंग पर बार कोडिंग आगामी एक जनवरी से लागू होना है। अप्पाजी के अनुसार, बार कोडिंग लागू होने से कंपनियों की लागत बढ़ेगी जबकि तकनीक को लेकर भी कई तरह की दिक्कतें हैं। एक फार्मा उत्पाद की बार कोडिंग का खर्च 50 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक बैठता है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने दो साल पहले फार्मा उत्पादों के निर्यात पर बार कोडिंग लागू करने का फैसला किया था। इसे अभी आंशिक तौर पर ही अमल में लाया जा सका है। बार कोडिंग पर सबसे अधिक आपत्ति इंडियन ड्रग्स मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन (आईडीएमए) को है।

फार्मा निर्यात 23 फीसदी बढ़ा
भारत का कुल निर्यात भले ही घट रहा है, लेकिन पिछले पांच साल में फार्मा निर्यात 16 फीसदी बढ़ चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान फार्मा निर्यात में करीब 23 फीसदी का इजाफा हुआ। निर्यात को और बढ़ावा देने के लिए वाणिज्य मंत्रालय की मदद से फार्मएक्सेल मुंबई में भारतीय दवा व्यापार मेले का आयोजन करने जा रहा है। अगले साल 24-26 अप्रैल को होने वाले ‘आईफेक्स-13’ नाम के इस आयोजन में 400 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदार और विभिन्न देशों के दवा नियंत्रण भाग लेंगे।
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