भ्रष्टाचार के मोर्चे पर संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी सियासी संग्राम की आग में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के नोटिस ने घी डाल दिया है।
ललित गेट और व्यापम घोटाला मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान के साथ ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों वसुंधरा राजे और शिवराज के बचाव में भाजपा ने वाड्रा की टिप्पणी को सियासी हथियार बना लिया।
कांग्रेस के तीखे विरोध के बीच भाजपा ने वाड्रा की टिप्पणी को संसद का अपमान बताते हुए उन्हें सदन में बुला कर दंडित करने की मांग की।
स्पीकर की ओर से इस मामले में भाजपा सांसद को बोलने का मौका दिए जाने के बाद संसद में विपक्ष ने जबर्दस्त हंगामा किया। कांग्रेस ने वाड्रा के सदन का सदस्य न होने की दलील देते हुए इस नोटिस पर तीखा एतराज जताया। खासतौर से इस दौरान सोनिया गांधी खासी उत्तेजित दिखी।
विशेषाधिकार हनन के नोटिस से और गरमाई सियासत
राज्यसभा में भी व्यापम और ललित गेट पर इस्तीफे के सवाल पर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी जंग जारी रही। सरकार बीते तीन दिन की तरह ललित गेट पर चर्चा तो विपक्ष आरोपी मंत्रियों के इस्तीफे के बाद ही चर्चा शुरू करने केअपने पुराने स्टैंड पर डटी रही।
इस दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली और माकपा के सीताराम येचुरी एक दूसरे से उलझते देखे गए। सरकार और विपक्ष के अपने अपने रुख पर डटे रहने के कारण संसद की कार्यवाही लगातार चौथे दिन हंगामे की वजह से ठप रही।
भ्रष्टाचार के सवाल पर मंत्रियों के इस्तीफा मामले में सरकार और विपक्ष के बीच तल्खी अब चरम पर पहुंच गई है। बीते तीन दिन से जारी तनातनी के बीच भाजपा ने ललित गेट और व्यापम पर कार्यस्थगन प्रस्ताव देने वाली कांग्रेस को घेरने के लिए वाड्रा की संसद के खिलाफ टिप्पणी मामले में सांसद कैलाश मेघवाल की ओर से विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे कर तल्खी को और बढ़ा दिया।
शून्यकाल के दौरान भाजपा के प्रहलाद जोशी ने कहा कि वाड्रा की टिप्पणी न केवल संसद पर हमला है, बल्कि इससे संसद की गरिमा को ठेस पहुंची है। ऐसे में वाड्रा को तलब कर दंडित किए जाने की मांग की।
वाड्रा पर चौथे दिन भी ठप रही संसद की कार्यवाही
इसके बाद कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे वेल में पहुंच गए। उन्होंने कहा कि वाड्रा सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनके खिलाफ नोटिस दिया न केवल मूखर्तापूर्ण है, बल्कि यह सरकार की तानाशाही को भी प्रदर्शित करता है।
राज्यसभा में भी बीते तीन दिनों की तरह चौथे दिन में कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। इस दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि कार्यस्थगन प्रस्ताव के नोटिस में विपक्ष ने चर्चा की मांग की है। सरकार की सहमति के बाद विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।
इस पर माकपा के सीताराम येचुरी ने नोटिस को गोपनीय बताते हुए इस पर सार्वजनिक टिप्पणी को नोटिस देने वाले सदस्य की अवमानना बताया। हालांकि जेटली ने भी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि नोटिस पर बातचीत असंवैधानिक नहीं है।
क्या थी वाड्रा की टिप्पणी
संसद शुरू हो गई है और साथ ही शुरू हो गई है क्षुद्र विभाजनकारी राजनीति। भारत की जनता बेवकूफ नहीं है। खेद है कि भारत का नेतृत्व ऐसे तथाकथित नेता कर रहे हैं।
नारों-पोस्टर पर वार पलटवार
आखिरकार तीन दिन बाद भाजपा ने विपक्ष की नारेबाजी का जवाब नारेबाजी और पोस्टर वार का जवाब पोस्टर वार से दिया। कांग्रेस का नारा था मोदी जी 56 इंच दिखाओ, सुषमा-वसुंधरा को तुरंत हटाओ। भाजपा का जवाबी नारा था उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, किसान की जमीन दामाद को बांटे।