कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी फिलहाल कुंवारे हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि वे जल्द शादी नहीं करने वाले हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि अगर मेरा विवाह हुआ और बच्चे हुए तो मैं चाहूंगा कि मेरे बच्चे ही मेरा स्थान लें।
इसके अलावा 42 वर्षीय नेता ने एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने के प्रति अनिच्छा प्रकट की है। हालांकि राहुल को पीएम बनाने की मांग करने वालों की होड़ लगी है।
लेकिन खुद कांग्रेस के इस युवा नेता ने यह कहकर सबको हैरान कर दिया है कि उनकी प्रधानमंत्री बनने में कोई रुचि नही है। राहुल के मुताबिक वह पूरा ध्यान पार्टी को मजबूत बनाने पर ही लगा रहे हैं।
व्हॉर्टन इकोनामिक फोरम से आमंत्रण मिलने के बाद राहुल मंगलवार सुबह से खबरों में थे। पत्रकारों ने जब उनसे इस मुद्दे पर बात करना चाहा तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
बकौल राहुल वह हाईकमान के कल्चर को खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं। पार्टी और गठबंधन को मजबूत बनाने के लिए लोगों से मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज मैं देखता हूं कि अधिकार के बिना सांसद कैसा महसूस करते हैं। यह स्थिति सभी दलों में है, चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा। मैं संसद में 720 सांसदों को अधिकार संपन्न बनाना चाहता हूं।
राहुल ने कहा कि वह मध्यम श्रेणी के नेताओं को सशक्त बनाना चाहते हैं। देश में कुछ ऐसे दल हैं जिसका संचालन एक नेता (बसपा), दो नेता (सपा), पांच या छह नेता (भाजपा) और 15 से 20 नेता (कांग्रेस) करते हैं। उनकी प्राथतिकता सांसदों और विभिन्न राज्यों में करीब 5000 हजार विधायकों को अधिकार संपन्न बनाना है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि हाईकमान संस्कृति 70 के दशक में उस समय शुरू हुई जब उनकी दादीमां के ऊपर चारों ओर से प्रहार हो रहा था। ‘मैं उनको जानता हूं और अगर मैं उनके स्थान पर होता तब ऐसा ही करता।’
राहुल ने कहा कि उनके आदर्श महात्मा गांधी हैं। वह गीता के निष्काम कर्म में विश्वास रखते हैं। महात्मा गांधी को अपना गुरु करार देते हुए उन्होंने कहा कि गांधीजी ने हर वर्ग के लोगों को प्रेरित किया।