वित्त मंत्री पी.चिदंबरम का मानना है कि 2014 होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद किसी की भी पूर्ण बहुमत वाली सरकार नहीं बनेगी।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 20वें स्थापना दिवस के मौके पर मुंबई में आयोजित एक परिचर्चा में उन्होंने कहा, ‘लेकिन अगर ऐसा होता है, तो यह कमजोरियों को दूर करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। मुझे लगता है कि हमें चुनाव तक इंतजार करना चाहिए। मैं पक्के तौर पर नहीं सकता कि इस चुनाव में किसी को भी संसद में पूर्ण बहुमत मिल पाएगा।’ चिदंबरम ने कहा अगले साल मई में लोकसभा चुनाव होने हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र इस समय मंथन के दौर से गुजर रहा है।
चिदंबरम की नजर में बीते 60 सालों के इतिहास में भारतीय लोकतंत्र ‘सबसे कमजोर स्थिति’ में है। उन्होंने कहा, ‘हमारी संस्थाओं के हद से आगे बढ़ने की वजह से कार्यों के निष्पादन में रुकावट या बाधा उत्पन्न हो रही है, संसद काफी हद तक पंगु हो चुकी है और यहां एक गलत रूमानी धारणा है कि हमारी सभी समस्याओं का एक न्यायपालिका ही हल है।’
वित्त मंत्री ने कहा, ‘संसद का काम कानून बनाना है और न्यायपालिका को उसे स्वीकार करना चाहिए। यहां कोई न्यायिक पैमाना नहीं हैं, जिसके जरिए न्यायाधीश किसी मुद्दे पर फैसला कर सकें। न्यायाधीश केवल उन्हीं मुद्दों पर फैसला कर सकते हैं, जहां कोई न्यायिक मानक हो।’ मेरे ख्याल से लोकतंत्र की जरूरी शर्तों के तहत कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। लेकिन इस लिहाज से हम इतिहास के सबसे कमजोर दौर में जी रहे हैं।