तकनीकी युग में विदेशी भाषा जानने वाले युवाओं के लिए जहां नौकरी और स्वरोजगार की संभावनाएं दिनोंदिन बढ़ रही हैं, वहीं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में चीनी और जापानी भाषा की पढ़ाई शिक्षक न होने के चलते पिछले चार साल से बंद है।
इस कारण इन भाषाओं को सीखकर रोजगार पाने का युवाओं का सपना टूट रहा है।
संपूर्णानंद में परंपरागत पाठ्यक्रमों के साथ ही कुछ विदेशी भाषाओं की भी पढ़ाई होती है। इनमें फ्रेंच, जर्मन, रूसी, तिब्बती, नेपाली और फारसी भाषा की कक्षाएं तो चल रही हैं लेकिन जापानी और चीनी के लिए शिक्षक ही नहीं हैं।
वर्ष 1977 में चीनी और 1990 में जापानी की पढ़ाई शुरू हुई थी। दो साल के डिप्लोमा और तीन साल के एडवांस डिप्लोमा कोर्स में दाखिला के लिए अर्हता इंटरमीडिएट थी। दोनों में 50-50 सीटें निर्धारित थीं।