सब्सिडी हासिल करने के लिए आधार नंबर की बाध्यता नहीं होगी। सरकार ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को वैधानिक दर्जा देने के साथ इसे भी स्पष्ट कर दिया है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट ने यूआईडीएआई बिल को कुछ संशोधनों के साथ मंजूर कर लिया। अब संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में इस विधेयक को पेश किया जाएगा। संशोधित बिल के मुताबिक आधार एक स्वैच्छिक सुविधा है।
वहीं आधार के दायरे में विदेशी भी शामिल हो सकेंगे। क्योंकि आधार की सुविधा देश में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को मिल सकती है।
योजना आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संशोधित बिल में भारत में मौजूद किसी भी निवासी के लिए आधार नंबर जारी किए जाने का प्रावधान है। इनमें भारतवासी के अलावा विदेशी नागरिक भी शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बिल के धारा 6 के मुताबिक इसके जरिए किसी व्यक्ति को नागरिकता, स्थायी निवास या किसी दूसरे तरह का अधिकार नहीं मिलेगा। क्योंकि आधार के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान की जाती है, उसकी राष्ट्रीयता की नहीं। इसे निवास प्रमाण पत्र भी माना जा सकता है।
अधिकारी ने कहा कि सब्सिडी मुहैया कराने के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। यह एक स्वैच्छिक सुविधा है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय एलपीजी सब्सिडी के लिए इसे अनिवार्य बनाने पर जोर दे रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार के बदले रुख को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने भी हाल में ही पेट्रोलियम मंत्रालय को यह सुझाव दिया है कि एलपीजी सब्सिडी मुहैया कराने के लिए आधार पंजीकरण की अनिवार्यता की जगह उपभोक्ताओं से सीधे बैंक खाता लेकर सब्सिडी की रकम भेज दी जाए।
मौजूदा समय में सरकार के आदेश से आधार नंबर नागरिकों को बांटे जा रहे हैं। राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण को आधार परियोजना संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा परियोजना के तहत संग्रहीत किए गए विवरण का दुरुपयोग पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया जा रहा है। मालूम हो कि यूआईडी प्राधिकरण की ओर से 18 राज्यों के 44 करोड़ निवासियों को आधार से अब तक जोड़ा जा चुका है।