अमरनाथ यात्रा के रूट पर कोई पक्की सड़क नहीं बनाई जाएगी। हाल ही में सड़क को लेकर उठे विवाद को थामते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
13 दिसंबर को सुनाए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को अमरनाथ यात्रा के लिए सभी तरह की आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने का आदेश दिया था। साथ ही उसने यह भी सुनिश्चित करने को कहा था कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौत न हो।
कश्मीर में सैयद अली शाह गिलानी समेत कई अलगाव वादी गुट यह दावा कर रहे थे कि अमरनाथ के रूट पर पक्की सड़क का निर्माण शुरू हो गया है। गिलानी ने आरोप लगाया था कि सरकार यहां ‘अमरनाथ नगर’ स्थापित करने के लिए यहां न्यायालय का प्रयोग कर रही है।
गिलानी ने यह भी दावा किया था कि पहलगाम और बालटाल से अमरनाथ की ओर जा रहे रूट पर पक्की सड़क बन चुकी है। जस्टिस बीएस चौहान और स्वतंत्र कुमार की पीठ ने इन दावों की हवा निकालते हुए कहा कि सभी पैदल रास्तों को न फिसलने वाली सीमेंट की टाइल या अन्य मैटेरियल से तैयार किया जाए, श्रद्धालुओं के लिए यही सही होगा।
पर्यावरण समेत अन्य मुद्दों पर कोर्ट ने कहा कि न तो हमने पक्की सड़क बनाने के लिए निर्देश दिए और न ही हमें लगता है कि इसकी जरूरत है। पालकी और घोड़ों के लिए अलग रास्ता होना चाहिए। हमें नहीं लगता कि वहां पर पक्की सड़क की कोई जरूरत है।