सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक चौकाने वाला फैसला दिया है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक इस नए फैसले के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति पर आपराधिक मामला दर्ज होता है तो उसे किसी भी सूरत में पुलिस में नौकरी नहीं मिलेगी। भले ही वह व्यक्ति कानून के समक्ष बाद में ऐसे किसी मामले में बरी ही क्यों न कर दिया गया हो।
जस्टिस टी एस ठाकुर और आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने अपने ताजा फैसले में कहा है कि पुलिस सेवा में भर्ती होने वाला सदस्य विश्वास के योग्य होना चाहिए और वह इंसाफ करने वाला व्यक्ति होना चाहिए, साथ ही वह बेदाग चरित्र वाला और ईमानदार होना चाहिए।
इसमे कहा गया है कि जहां तक उम्मीदवार की उपयुक्तता का संबंध है तो पूरी जांच प्रक्रिया के जरिए उसके दोषमुक्त या बरी हो जाने से भी फर्क नहीं पड़ता है। फैसले में कहा गया है कि अगर उम्मीदवार दोषमुक्त और बरी भी हो जाता है तो भी उसे पूरी तरह से दोषमुक्त नहीं माना जा सकता है। बेंच के मुताबिक जो पुलिस की विश्वसनीयता को कम करता हो उसे पुलिस दल में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
आपराधिक मामलों में बरी होने पर कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त की मासूमियत को निर्णायक नहीं माना जा सकता है, ऐसा आदेश उचित संदेह के इतर तब भी दिया जा सकता है जब अभियोजन पक्ष आरोपी पर अपराध सिद्ध न कर पाने की सूरत में हो।