उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा भ्रष्टाचार के मामलों में दूसरों की शिकायत सुनने से ज्यादा खुद के खिलाफ दर्ज किए जा रहे मुकदमों से परेशान हैं। वे कहते हैं कि जिस भी प्रभावशाली नेता व अफसर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में वे स्टैंड लेते हैं वही उनके खिलाफ हाईकोर्ट चला जाता है। ऐसे मामलों में उनके फैसले को चुनौती न दे करके खुद उन्हें वादी बनाया जा रहा है।
लोकायुक्त मेहरोत्रा दिल्ली में चल रहे देश भर के लोकायुक्तों के सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए हुए हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोकायुक्त के रूप में जो भी मामला उनके सामने आता है तो शिकायत में पर्याप्त तथ्य होने पर ही वे जांच के आदेश देते हैं।
ऐसे ज्यादातर मामले राजनीतिक दलों से जुड़े होते हैं। मेहरोत्रा के अनुसार उनके फैसलों से प्रभावित होने वाले लगभग दो दर्जन व्यक्तियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा लखनऊ बेंच में मुकदमा कर दिया है। हर मुकदमे में उन्हें व्यक्तिगत रूप से पार्टी बनाया गया है।
मेहरोत्रा ने बताया कि वे हाईकोर्ट में अपने खिलाफ मुकदमा लड़ें या लोकायुक्त की अपनी जिम्मेदारी निभाएं। यही नहीं मुकदमा करने वाले लोग प्रभावशाली तथा संपन्न हैं। वे मंहगे वकील अपने मुकदमों की पैरवी के लिए रखते हैं। उनके मुकाबले में वे सरकार से वकील की मांग कर सकते हैं लेकिन जब मुकदमा करने वाला भी सरकार से जुड़ा हो तो वह आसानी से सरकारी वकील को भी प्रभावित कर लेता है।
मेहरोत्रा लोकायुक्त के रूप में अपनी इस समस्या को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने भी रख चुके हैं। मेहरोत्रा ने कहा कि जल्द ही वे यह मामला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भी रखेंगे कि ऐसे हालात में कोई लोकायुक्त कैसे अपना दायित्व निभा सकेगा।