बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संकेतों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि पहले वाले (डा. मनमोहन सिंह) बोलते ही नहीं थे और आज वाले (नरेंद्र मोदी) किसी की सुनते ही नहीं हैं।
सिर्फ बोलने से सब नहीं हो सकता। उन्होंने खुद के बारे में कहा कि वह ज्यादा करते हैं और कम बोलते हैं। बिहार डेवलपमेंट डायलॉग में नीतीश ने बिहार के विकास मॉडल की जमकर ब्रांडिंग की।
उन्होंने कहा कि 2025 के बिहार के लिए विजन दस्तावेज बनाने के क्रम में सभी पक्षों और आम लोगों की सलाह ली जा रही है। इसी क्रम में पटना के बाद दिल्ली में संवाद कार्यक्रम रखा गया।
जाति हकीकत है
देश में समेकित और संतुलित विकास मॉडल की जरूरत है। फिलहाल विकास के कुछ
द्वीप खड़े हो गए हैं। यह स्वस्थ स्थिति नहीं है। उन्होंने दस साल में
बिहार के विकास का उदाहरण देते हुए आंकड़े भी गिनाए।
संवाद में श्रोताओं
के सवालों का जवाब देते हुए नीतीश ने जाति को धरातल की सच्चाई बताया।
उन्होंने कहा कि जाति हकीकत है और पूरे देश में कोई राज्य इससे अछूता नहीं
है। लेकिन किसी पार्टी को जातिवाद का सहारा नहीं लेना चाहिए।
सिर्फ बिहार
को बदनाम करना ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करते
हुए उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर विराजमान व्यक्ति की जाति को
प्रचारित किया जा रहा है। यह आवाज बिहार से नहीं आई है।
झेलने पड़े कड़वे सवाल
उनका इशारा गुजरात
और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर था। नीतीश ने कहा कि
विकास की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य दोनों की है। केंद्र और राज्यों में
अलग-अलग दलों की सरकारों के बावजूद विकास कार्य हुए हैं।
अगर ऐसा नहीं होता
है तो संघवाद का सिद्धांत बेमानी है। यूपीए शासनकाल में मध्य प्रदेश और
छत्तीसगढ़ का विकास हुआ। इसलिए केंद्र और राज्यों में एक ही दल की सरकार
हो, यह सिद्धांत ठीक नहीं है।
पहले केंद्र और राज्यों में एक ही दल की
सरकार होती थी लेकिन विकास की गति धीमी रही। नीतीश को बिहार के शोध छात्रों
के कड़वे सवालों से भी रूबरू होना पड़ा। बिहार में शिक्षा के गिरते स्तर
और बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित सवाल झेलने पड़े।