लोकसभा चुनाव खत्म नहीं हुए हैं लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में अपनी सरकार बचाने की जुगत में अभी से जुट गए हैं। उन्हें लग रहा है कि चुनाव में खरा प्रदर्शन पार्टी में उनके खिलाफ बगावती सुर तेज होने की वजह बन सकता है।
यही कारण है कि नीतीश न केवल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव से दूरियां कम करने में जुटे हैं, बल्कि विधायकों के कुनबे को भी अभी से एकजुट करने में लग गए हैं।
243 सदस्यों वाली विधानसभा में नीतीश सरकार कांग्रेस, निर्दलीय और सीपीआई के विधायकों के रहमोकरम पर टिकी है। आम चुनाव के बाद कांग्रेस ने राजद के दबाव में जदयू से दूरी बनाई तो नीतीश के लिए सरकार बचाना बेहद मुश्किल होगा।
भाजपा करेगी सरकार गिराने की कोशिश
वैसे भी राजद के साथ-साथ भाजपा चुनाव बाद सरकार को गिराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकेगी। दरअसल बिहार में आम चुनाव में मुख्य मुकाबले से बाहर मानी जा रही जदयू में परिणाम आने के बाद बगावत के आसार बनते दिख रहे हैं।
पार्टी अध्यक्ष शरद यादव राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ-साथ नीतीश को भी जातिवादी राजनीति करने वाला करार देने के बाद हालांकि पीछे हट गए।
मगर सूत्रों का कहना है कि नीतीश के साथ मनमुटाव के बाद शरद ने जानबूझ कर यह बयान दिया था। हालांकि बदली परिस्थितियों को भांप कर नीतीश ने पहली बार आगे बढ़कर शरद से रिश्ते बेहतर करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
रुठों को मनाने में जुटे नीतीश
इसी के तहत उन्होंने शरद को खुद वाराणसी जाकर आम आदमी पार्टी के समर्थन में रैली करने की इजाजत दी। हालांकि पहले नीतीश इसके खिलाफ थे। उनके विश्वस्त वशिष्ठ नारायण सिंह ने रैली के खिलाफ बयान देकर इस ओर इशारा कर दिया था।
वैसे भी बिहार विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से कमजोर पड़ चुके नीतीश के सामने अब रूठे हुए नेताओं को मनाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।
भाजपा से अलग होने के बाद कांग्रेस के 4, 4 निर्दलीय और भाकपा के एक विधायक के सहारे नीतीश ने जदयू के 117 विधायकों के साथ बहुमत तो हासिल कर लिया था, मगर नई परिस्थिति बिल्कुल बदली हुई है।
आगे आने वाला समय कठिन
एक ओर जहां नीतीश ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में अपनी पार्टी के 5 विधायकों को बाहर कर दिया है, वहीं राजद अभी से कांग्रेस पर सरकार से समर्थन वापस लेने का दबाव डाल रही है।
यही कारण है कि बदली राजनीतिक परिस्थितियों में नीतीश जदयू में फूट की हर संभावना को खत्म करने के साथ ही कांग्रेस को भी साथ रखने की अभी से परिस्थिति तैयार करने में जुटे हैं।