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भाजपा-जदयू गठबंधन टूटना तय, 15 को ऐलान

Fri, 14 Jun 2013 12:16 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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भाजपा-जदयू के 17 साल पुराने गठबंधन को बचाने की तमाम कोशिशें नाकाम हो गई हैं।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजग से बाहर आने का अंतिम फैसला कर लिया है। इसकी औपचारिक घोषणा 15 जून को बुलाई गई जदयू विधायकों की बैठक के बाद किए जाने की संभावना है।

दोनों ही दलों के उच्च पदस्थ सूत्रों ने संबंध बचाने की सभी कोशिशों के नाकाम हो जाने की बात स्वीकार की है।
गठबंधन बचाने के लिए जदयू ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार न बनाने की सार्वजनिक घोषणा करने की कठिन शर्त रखी थी।

मोदी को पार्टी का नया चेहरा बना कर इस दिशा में बहुत आगे बढ़ चुकी भाजपा ने इस शर्त को मानने से इंकार कर दिया है।

हालांकि गठबंधन बचाने के लिए भाजपा की ओर से बृहस्पतिवार को भी अंतिम कोशिशें जारी रहीं।

एक ओर पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी और मुख्तार अब्बास नकवी ने जदयू अध्यक्ष शरद यादव को तो दूसरी ओर लालकृष्ण आडवाणी के बाद राजनाथ सिंह और डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने फोन पर नीतीश को मनाने की कोशिश की।
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जदयू सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाए जाने की अंतिम शर्त रखी। जदयू की मांग थी कि भाजपा 15 जून को बुलाई गई विधायकों की बैठक से पहले इस आशय की सार्वजनिक घोषणा करे।

बीते दिनों गोवा की कार्यकारिणी में आडवाणी के विरोध के बावजूद मोदी को पार्टी का नया चेहरा बना चुकी भाजपा ने जदयू की इस शर्त को मानने में असमर्थता जता दी है।

भाजपा चाहती थी कि इस मामले में जदयू थोड़ा इंतजार करे क्योंकि पार्टी ने अपनी ओर से अभी किसी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।

भाजपा नेताओं ने शरद और नीतीश से बातचीत में यही बात कही। दोनों ही दलों के उच्च पदस्थ सूत्रों ने स्वीकार किया कि जदयू ने भाजपा का साथ छोड़ने का फैसला कर लिया है तो भाजपा भी मान रही है कि इस विवाद में बीच का रास्ता निकालना संभव नहीं है।

उधर, गडकरी और नकवी के साथ देर तक हुई बैठक के बाद शरद यादव ने हालांकि गठबंधन के फिलहाल बरकरार रहने की बात कही। मगर इसके साथ ही यह भी जोड़ दिया कि अंतिम फैसला 15 जून की बैठक के बाद लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गठबंधन के सवाल पर वह बैठक के बाद ही कुछ कह पाएंगे। नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को भी नया मोर्चा बनाने के अभियान पर डटे रहने का संकेत दिया।

उन्होंने कहा कि पिछड़ेपन के मामले में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार की समस्या एक जैसी है। इस दौरान भी नीतीश से भाजपा को हमेशा के लिए बाय-बाय करने के संकेत दे दिए।

हमारी कोशिश गठबंधन को बनाए रखने की है। शिवसेना, अकाली दल की तरह जदयू से भी भाजपा के पुराने और भावनात्मक रिश्ते हैं। इसलिए भाजपा नहीं चाहती कि यह साथ छूट जाए।--राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष

जदयू ने किया बहुमत का जुगाड़
जदयू सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ नेताओं की बैठक में पहले ही राजग का साथ छोड़ने का फैसला हो चुका है। भाजपा से संबंध तोड़ने के बाद बिहार में सरकार बचाने के लिए बहुमत का जुगाड़ भी हो चुका है।
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राज्य की 243 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जदयू को 122 विधायकों का समर्थन चाहिए। इनमें से 118 विधायक पार्टी के हैं, जबकि सभी छह निर्दलीय विधायक जदयू को समर्थन देने के लिए तैयार हो गए हैं।
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