फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आरोपों पर झल्लाए गडकरी, बोले दे दूंगा इस्तीफा

विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को राज्यसभा में दावा किया कि अगर किसी अदालत में उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप साबित होता है तो वे मंत्री पद के साथ संसद की सदस्यता से भी इस्तीफा देने को तैयार हैं।
विज्ञापन


गडकरी अपनी कंपनी पूर्ति से संबंधित कैग की रिपोर्ट पर बयान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों को उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना शोभा नहीं देता है।

कैग की रिपोर्ट में उन पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया गया है और उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी भी नहीं की गई है। लोक लेखा समिति को इस मामले में निर्णय लेने दिया जाए।
विज्ञापन


अगर अपराध साबित होता है तो वे उसे कबूल कर लेंगे। यह संसद का लगातार तीसरा दिन था जब कांग्रेस की ओर से गडकरी को घेरने की कोशिश हो रही थी।

गडकरी के इस्तीफे की मांग

राज्यसभा में इस मामले को कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी ने उठाया। वहीं लोकसभा में दीपेंद्र हुडा ने कैग की रिपोर्ट के आधार पर गडकरी के इस्तीफे की मांग की। राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कई अहम बिलों को पास नहीं कराना चाहती। इसलिए सदन में हंगामा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कैग ने यूपीए सरकार के समय इरेडा की ओर से कर्ज को एक मुश्त तरीके से चुकाने की नीति पर भी सवाल उठाए हैं। चूंकि कैग की रिपोर्ट लोक लेखा समिति को जाती है और उसके बाद सदन में पेश की जाती है, इसलिए इस मुद्दे पर हंगामा करने की जरूरत नहीं है। इस बीच सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।

हालांकि दोपहर में गडकरी ने अपना बयान देने के बाद स्पष्टीकरण पर जवाब भी दिया लेकिन उनके जवाब से असंतोष जाहिर करते हुए कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया।
विज्ञापन

प्रमोद तिवारी और गडकरी में सवाल-जवाब

गडकरी ने कहा कि इरेडा के सामने कोई गलत तथ्य नहीं रखा गया था। पूर्ति शक्कर कंपनी के लिए इरेडा से लिए गए कर्ज को चक्रवृद्धि ब्याज के साथ लौटाया गया था। इस पर प्रमोद तिवारी ने पूछा कि जब इरेडा ने बगास से बिजली बनाने के लिए कर्ज दिया था, तब कोयले से बिजली क्यों बनाई गई। 16 कंपनियों के वजूद का अब तक पता नहीं है।

उनकी कंपनी के पांच प्रमोटर चाल में रहते हैं और उनके ड्राइवर करोड़ों रुपये के प्रमोटर हैं। इस पर गडकरी ने उल्टे सवाल दाग दिया कि क्या किसी गरीब व्यक्ति या ड्राइवर को कंपनी में निदेशक बनने का अधिकार नहीं है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि तीन चीनी मिलों के बंद होने के कारण बगास नहीं मिलने पर कोयले से बिजली बनाई गई। इरेडा का कर्ज वन टाइम सेटेलमेंट प्रक्रिया के तहत भुगतान कर दिया गया था।

इसके लिए महाराष्ट्र सरकार, वन व पर्यावरण मंत्रालय और अन्य संबंधित विभाग से अनुमति भी ली गई थी। उन्होंने दावा किया कि सरकार से एक रुपये की भी सब्सिडी नहीं ली गई है। गडकरी ने कहा कि वे 2000 से 2011 के बीच पूर्ति कंपनी के अध्यक्ष थे। 2011 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इरेडा ने जब कंपनी को ऋण दिया था, तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। उस समय वे सांसद या सरकार में किसी पद पर नहीं थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें