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...तो सीबीआई से हेडली का बयान साझा नहीं करेगी एनआईए

Sun, 18 Aug 2013 07:00 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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इशरत जहां ‘फर्जी’ एनकाउंटर की जांच कर रही सीबीआई को एनआईए से मदद मिलती नहीं दिख रही है।
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इस मामले की जांच में 26/11 हमले में शामिल आतंकी डेविड हेडली से मिली जानकारी अहम साबित हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) यह जानकारी साझा करने के पक्ष में नहीं है। इसके पीछे एनआईए ने अमेरिका के साथ हुए गोपनीय करार का हवाला दिया है।

इस कारण गृह मंत्रालय अजीब स्थिति में फंस गया है। मंत्रालय ने एफबीआई को दिए गए हलफनामे का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि मंत्रालय एनआईए के अलावा किसी भी अन्य जांच एजेंसी के साथ इस बयान को साझा नहीं करेगा।
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सीबीआई ने इशरत जहां के लश्कर-ए-ताइबा के साथ संबंध होने की रिपोर्टों की सत्यता की जांच के लिए एनआईए को बयान साझा करने के संबंध में लिखा था। मगर एनआईए ने गोपनीय करार का हवाला देते हुए गृह मंत्रालय को बताया कि वह सीबीआई के साथ हेडली के बयान को साझा नहीं कर सकता।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के बाद ही सूचना को साझा कर सकता है।

सूत्रों ने बताया कि हेडली का बयान साझा करना अमेरिकी प्रशासन को दिए गए हलफनामे का उल्लंघन होगा और यह कदम उठाने से यह खतरा हो सकता है कि अमेरिका भविष्य में भारत के साथ सहयोग न करे।
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इस स्थिति में घिरे गृह मंत्रालय ने किसी अंतिम फैसले पर पहुंचने से पूर्व कानून मंत्रालय की राय लेने का फैसला किया है क्योंकि सीबीआई तथ्यों का पता लगाने के लिए हेडली के इकबालिया बयान को साझा करने का दबाव बना रही है।

हेडली ने अपने बयान में कहा था कि इशरत आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के लिए काम करती थी।
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