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रेल डीजल इंजन से होने वाले प्रदूषण पर मांगी रिपोर्ट

Sun, 01 Nov 2015 07:59 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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रेलवे के डीजल इंजनों से होने वाला उत्सर्जन कितना प्रदूषित है इस बात की जांच के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रेल मंत्रालय से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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ग्रीन पैनल ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उत्सर्जन मानकों की तुलना के आधार पर तैयार होनी चाहिए। वहीं ट्रिब्यूनल ने रेल मंत्रालय, आईआईटी दिल्ली के सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ बैठक के भी निर्देश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। द्वारका के स्थानीय निवासी एसके गोयल ने एनजीटी में इस संबंध में याचिका दाखिल की थी।
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याचिका में कहा गया था कि रेलवे के लोकोमोटिव डीजल इंजन की वजह से कई खतरनाक गैसों का उत्सर्जन होता है। इसके बाद ग्रीन पैनल ने रेलवे को उच्चस्तरीय बैठक में उत्सर्जन के मानकों को तय करने के निर्देश दिए हैं।
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अभी 25 इंजनों की जांच बाकी

रेलवे ने ग्रीन बेंच को बताया कि उसने अभी तक 25 लोकोमोटिव इंजन की जांच की है। नतीजे पर पहुंचने के लिए 25 और इंजनों की जांच करना शेष है। इसके बाद ग्रीन बेंच ने रेलवे को दो हफ्तों की मोहलत दे दी है।

वहीं रेल मंत्रालय की ओर से पेश एडवोकेट ओम प्रकाश ने ग्रीन बेंच को आश्वासन दिया कि नए लोकोमोटिव डीजल इंजनों के उत्सर्जन को लेकर गाइडलाइन तैयार की जा रही है।

इसके लिए वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी। इसकी शुरुआती लागत करीब 19 करोड़ रुपये होगी। इसमें पेट्रोलियम मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय से भी सहयोग लिया जायेगा।

मालूम हो कि ग्रीन पैनल के आदेश के बाद उत्सर्जन मानकों को लेकर जनवरी में ही मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल तैयार किया गया था। इसके लिए ग्रीन बेंच ने एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी में सीपीसीबी, पेट्रोलियम मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और आईआईटी दिल्ली के साथ इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी शामिल थी।
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