ऐसा लगता है कि मुकेश अंबानी पर हमला करना आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अब अरविंद केजरीवाल की मुख्य रणनीति का हिस्सा बन चुका है। कानपुर में हुई आम आदमी पार्टी की रैली में भी कुछ यही हाल रहा।
झाड़ू चलाओ, बेईमान भगाओ रैली को संबोधित करते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी पर मुकेश अंबानी के हाथों में खेलते हैं।
गैस के दामों से जुड़ा मुद्दा एक बार फिर उठाते हुए केजरीवाल ने मोदी और राहुल की चुप्पी पर सवाल उठाया। और एक बार फिर कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके मालिक का स्विस बैंक में खाता है। उन्होंने रैली में दो तथाकथित अकाउंट नंबर भी बताए। लेकिन इन नंबरों को लेकर खुद केजरीवाल अब फंसते दिख रहे हैं।
मेरी रैली में कराएं धमाके!
भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुजफ्फरपुर में आयोजित हुंकार रैली में राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला।
मोदी ने पटना रैली के धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी रैली में राजनीतिक द्वेष के चलते धमाके कराए गए। इन धमाकों में मरने वाले भी मेरे ही बिहार के भाई थे।
मोदी ने कहा, 'मैं 27 अक्टूबर को पटना आया था। बिहार के लोगों ने मेरा सम्मान किया, लेकिन उसी समय राजनीतिक द्वेष के कारण निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।'
मोदी ने कहा कि इन बम धमाकों ने पटना की धरती को लहूलुहान कर दिया। ये बम धमाके हिंदुस्तान के भाईचारे पर, एकता और सद्भावना पर हुए थे। लेकिन कोई कितनी भी कोशिश कर ले, बिहार की जनता ने अपना मन बना लिया है।
जमीन उगल रही है सोना
एमपी के आगर में एक खेल का मैदान उगल रहा है सोना। लोग फावडा-खुरपी लेकर सोना खोज रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये मैदान लाखों का सोना उगल चुका है।
हवेलियों और खहंडरों में खजाना दवे होने की बात तो आप सबने सुनी होगी लेकिन खाली जमीन से सोना निकलते पहली बार दिख रहा है।
खबर के मुताबिक जमीन को खेल का मैदान बनाने के लिए समतल किया जा रहा था कि अचानक वहां से सोने के सिक्के निकलने लगे। खबर इलाके में फैली तो लोग जमा होने लगे।
जिसे देखो वही खुदाई करने लगा। बड़े से लेकर बच्चे तक सभी खुदाई में लग गए। खबर पुलिस तक पहुंची तो वह भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस को देख ग्रामीण भाग गए।
हालांकि अभी तक ये पता नहीं चल पा रहा है कि आखिर ये सोने के सिक्के यहां से क्यों और कैसे निकल रहे हैं।
राजस्थान में रहते हैं या फिर मध्यप्रदेश में
क्या ऐसा हो सकता है कि कोई घर हो मध्यप्रदेश में लेकिन उसका दरवाजा राजस्थान में खुलता हो। लेकिन मध्यप्रदेश राजस्थान सीमा पर कई कस्बों के हाल बड़े अजीब हैं।
सीमा के एक ओर मप्र का भैसोदामंडी है तो दूसरी ओर राजस्थान का भवानीमंडी। कुछ घरों के हाल तो ऐसे हैं कि मकान मप्र में है लेकिन उसका मुख्य दरवाजा राजस्थान में खुलता है। भैसोदामंडी के लोगों ने कुछ साल पहले भवानीमंडी में शामिल होने की मांग की थी जिस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।
यहां कस्बे एकदम सीमा पर हैं। कई गलियां ऐसी हैं जिनको देखकर अंदाजा भी नहीं नहीं लगाया जा सकता कि ये कौन से प्रदेश का इलाका है, रेलवे स्टेशन पर बुकिंग क्लर्क मध्यप्रदेश में बैठता है और टिकट कटाने वाले यात्री राजस्थान की सीमा में खड़े होकर टिकट कटाते हैं।
58,000 नौकरियां एक ही प्रोजेक्ट से
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा की उपस्थिति में डीएमआईसी के शुभारंभ से पहले अर्ली बर्ड प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप का शिलान्यास किया।
ग्रेटर नोएडा में इस टाउनशिप के विकास से 33 हजार करोड़ रुपये के पूंजी निवेश और 58 हजार नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।
ईस्टर्न व वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के संपूर्ण विकास पर यूपी में 30 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक निवेश 24 लाख करोड़ रुपया पहुंच जाएगा।
यहां मिलेगी 400 लोगों को जल्द नौकरी
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के तहत ए, बी और सी वर्ग के पदों को भरा जाना है। इन पदों में स्टेनोग्राफर, क्लर्क, तक्निशियन, सफाई निरीक्षक, फार्मासिस्ट, मकैनिक और अन्य ट्रेड्स के लिए आवेदन आमत्रिंत किए गए हैं।
योग्य उम्मीदवार 31 मार्च, 2014 तक आवेदन जमा कर सकते हैं।
मोदी की टक्कर में खड़ा हो पाएगा ये हीरो
जाट आरक्षण को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दिलाकर चौ. अजित सिंह ने जो पैंतरा चला है, वह विपक्षी पार्टियों पर ही नहीं बल्कि उनके विरोधी जाट नेताओं पर भी भारी पड़ा है।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दबाव की राजनीति कर अजित सिंह ने जो दांव चला है, उससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद नये चुनावी समीकरण लेकर सामने आया है।
जाट आरक्षण की मांग 1949 में पूर्व प्रधानमंत्री और चौ. अजित सिंह के पिता चौधरी चरण सिंह ने उठाई थी। इसके बाद चौ. अजित सिंह ने आरक्षण की मांग को ठंडा नहीं होने दिया। जिसके चलते प्रदेश स्तर पर तो जाटों को आरक्षण मिला। लेकिन केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की मांग बनी रही।
बाप-बेटे हुए एक और मिले गले
छह साल से जारी कानूनी लड़ाई अब अंत की ओर बढ़ चली है। इसमें भावनात्मक दलीलें भी दी गईं और डीएनए टेस्ट की भी चर्चा हुई। मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनडी तिवारी से जुड़ा है।
एक तरफ रोहित शेखर दावा कर रहे थे कि वह एनडी तिवारी के बेटे हैं और उन्हें यह स्वीकार करना चाहिए। दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता बार-बार कह रहे थे कि ऐसा कुछ नहीं है।
रोहित और उनकी मां ने तस्वीरों समेत कई सबूत सामने रखे, मामला अदालत तक गया और फिर शुरू हुई ऐसी लड़ाई, जिस पर देश भर की निगाह थी। लेकिन अब एनडी तिवारी ने रोहित शेखर को बड़ा खुलासा कर दिया है।
सस्ते चावल ने बना दिया शराबी
पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना को बकवास करार दे दिया। उन्होंने एक रुपये किलो चावल दिए जाने की योजना की आलोचना की।
उन्होंने यहां तक कहा कि इस योजना के कारण यहां के लोग शराबी बन गए। उन्होंने कहा कि इस योजना के कारण मजदूरी महंगी हो गई, विकास ठप्प हो गया और लोग शराबी हो गए।
कांग्रेस पहले भी ये आरोप बीजेपी सरकार पर लगाती रही है। कांग्रेस नेताओं ने पहले भी कहा है कि," ग्रामीण क्षेत्रों में एक नई पूंजी पैदा हो गई है, जो नकारात्मक कामों में लग रही है।"
छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है और रमन सिंह सीएम हैं। रमन सिंह की एक रुपये किलो चावल देने की स्कीम के कारण उनका नाम 'चावल वाले बाबा' पड़ गया है। 2007 से रमन सिंह की सरकार एक रुपये किलो के हिसाब से 35 किलो चावल दे रही है।
फेसबुक से डर गए मोदी
देश का अगला पीएम बनने का ख्वाब सजा रहे नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियों में आक्रामक रुख अख्तियार करते हैं। रैली कहां हैं, इस बात का खास ध्यान रखा जाता है। अपने और अपने गुजरात के तार उस इलाके से कैसे जोड़ने है, इस पर भी फोकस रहता है।
और हालिया दिनों में देखने को मिला कि वह कविताओं के जरिए भी मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। चायवाला, पिछड़ा वर्ग से आना और गरीब परिवार में बढ़ा होना, कुछ ऐसी खास चीजें हैं जिनसे मोदी कनेक्ट करने की ख्वाहिश रखते हैं।
लेकिन अब कुछ ऐसा हुआ है, जिससे जनता से जुड़ने की इन कोशिशों पर सवालिया निशान लगना चाहिए। मोदी ने फेसबुक पर आम जनता से सीधी बातचीत करने से जुड़े कार्यक्रम से अपना नाम वापस ले लिया है। जाहिर है, सवाल खड़ा होना लाजिमी है कि ऐसा उन्होंने क्यों किया?