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UPPSC के नए अध्यक्ष को बदलने होंगे कई फैसले

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के नए अध्यक्ष के लिए भी राह आसान नहीं दिख रही। अभी नए अध्यक्ष का नाम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन भर्तियों की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए कार्यभार संभालने के बाद नए अध्यक्ष को पूर्व में लिए गए कई फैसलों को तत्काल बदलना होगा। अन्यथा, उन्हें भी प्रतियोगियों के तीव्र विरोध तथा कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ेगा।
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भर्तियों में अनियमितता पर पर्दा डालने के लिए लोकसेवा आयोग में पिछले ढाई साल में कई विवादित फैसले लिए गए। यहां तक कि आयोग चयनितों के नाम भी घोषित नहीं करता। आयोग की एक बैठक में हुए फैसले के तहत सिर्फ रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं।

यहां तक कि पीसीएस में चयनितों के नाम भी आयोग ने घोषित नहीं किए। इससे पहले आयोग में चयनितों की जाति घोषित न करने का निर्णय लिया गया था। आयोग ने अंकपत्र देखने की प्रक्रिया भी काफी जटिल कर दी है। पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव की अध्यक्षता में कई अन्य फैसले भी लिए गए जिससे भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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इतना ही नहीं आयोग ने परीक्षा केंद्र एलाटमेंट की व्यवस्था भी बदल दी है। नई व्यवस्था के तहत संबंधित या नजदीक के जिले में परीक्षा केंद्र नहीं दिया जाता। दूर के जिलों में भेजा जाता है। इतना ही नहीं अनिल यादव ने इटावा, मैनपुरी को भी परीक्षा केंद्र बना दिया। इससे भी प्रतियोगियों में काफी नाराजगी है। अनिल यादव पर जो आरोप लगते रहे हैं उनसे बचने के लिए नए अध्यक्ष को इन फैसलों को बदलने होंगे। इसके अलावा अनिल यादव की कार्यशैली की वजह से आयोग की साख भी धूमिल हुई है। नए अध्यक्ष के सामने उसे फिर से स्थापित करने की भी चुनौती होगी।
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कार्यवाहक अध्यक्ष की नियुक्ति में क्या है कारण

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। कई सदस्यों के साथ भी विवाद जुड़ा हुआ है। इनकी योग्यता को आधार बनाकर प्रतियोगियों की ओर से याचिका दाखिल करने की भी तैयारी की गई है। ऐसे में इनमें से किसी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाने पर विवाद और गहराने की आशंका है। कार्यवाहक अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी के पीछे इसे भी एक कारण माना जा रहा है।

आयोग में इस समय राजेंद्र कुमार वरिष्ठतम सदस्य हैं। हालांकि राजेंद्र कुमार का एक महीने के भीतर ही कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनके अलावा फरमान अली, मेजर संजय यादव, सुनील जैन और जयराम वैद्य सदस्य हैं। हाईकोर्ट ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति को जिस तरह से योग्यता के आधार पर निरस्त किया है, उसे देखते हुए भी लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों की नियुक्ति पर भी भी सवाल उठने लगा है।

एक सदस्य बीएमएस हैं तो दूसरे डिग्री कालेज में प्रवक्ता है। एक अन्य सदस्य की योग्यता पर काफी विवाद है। अनिल यादव के खिलाफ कानूनी लड़ने वाले प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति से जुड़े प्रतियोगियों की ओर से इन सदस्यों के खिलाफ भी दशहरा के बाद याचिका दाखिल करने की तैयारी है। ऐसे में इनमें से किसी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाने पर विवाद बढ़ने की आशंका है।
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