अलग तेलंगाना राज्य पर सहमति ने अरसे से अलग राज्य की मांग कर रहे लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी है। इस सहमति से देश के उन हिस्सों में परेशानी बढ़ने की संभावना बढ़ गई है, जहां अरसे से अलग राज्य की मांग उठती रही है।
चुनाव नजदीक होने के कारण नए राज्यों की मांग पर तीखी राजनीति शुरू होने के भी आसार बनते दिख रहे हैं। गोरखालैंड और बोडोलैंड को अलग राज्य नहीं बनाने पर केंद्र को उग्र प्रदर्शन की चेतावनी मिली है।
वहीं, रालोद मुखिया अजित सिंह ने उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन की मांग कर तीन नए राज्यों के गठन की मांग में हवा भरने की कोशिश की है।
इसी क्रम में मंगलवार को कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेमवार ने अलग विदर्भ राज्य की मांग कर महाराष्ट्र की सियासत में गर्मी लाने का संकेत दे दिया। गौरतलब है कि तेलंगाना सहित लगभग एक दर्जन नए राज्यों की मांग अरसे से हो रही है।
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अलग तेलंगाना पर सहमति बनते देख अलग राज्य की मांग करने वाले अचानक सक्रिय हो गए हैं। गोरखालैंड की मांग करने वाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा और बोडोलैंड की मांग करने वाले बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने तेलंगाना के बाद इन दो राज्यों पर तत्काल फैसला करने की मांग की है।
दोनों ही संगठनों ने मांगे नहीं माने जाने की स्थिति में हिंसक आंदोलन की चेतावनी दी है। तेलंगाना पर सहमति बनते देख दोनों संगठन लगातार बंद का आयोजन कर रहे हैं।
उधर, रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने तेलंगाना के संदर्भ में बुलाई गई यूपीए समन्वय समिति की बैठक में उत्तर प्रदेश के पुनगर्ठन की मांग उठाई।
साथ ही कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेमवार ने अलग विदर्भ की मांग करते हुए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। जाहिर है कि चुनाव नजदीक होने के कारण इस मुद्दे पर जम कर सियासत होगी।
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वैसे भी देशभर में अरसे से लगभग एक दर्जन राज्यों की गठन की मांग होती रही है। उत्तर प्रदेश का बंटवारा कर तीन नए राज्य हरित प्रदेश, बुंदेलखंड (मध्य प्रदेश का सागर जिला भी शामिल) और पूर्वांचल बनाने की मांग बेहद पुरानी है।
पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर में अरसे से अलग गोरखालैंड और बोडोलैंड की मांग की जाती रही है। इसके अलावा महाराष्ट्र में विदर्भ, गुजरात में सौराष्ट्र, कर्नाटक में कुर्ग और बिहार में मिथिलांचल को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए भी अरसे से आंदोलन चल रहा है।
अब तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने पर सहमति बन चुकी है। ऐसे में अन्य हिस्सों से नए राज्य के गठन की मांग के जोर पकड़ने की पूरी संभावना है।