महीनों से शांत बैठे नक्सलियों के शीर्ष नेताओं ने अपने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) में नए लड़के और लड़कियों का दस्ता तैयार कर उसे बड़ी वारदात करने की खुली छूट दे रखी थी।
आंध्र प्रदेश के नक्सली नेता कटकम सुदर्शन की अगुवाई में हुए इस ऑपरेशन में शामिल नब्बे फीसदी नक्सलियों का यह पहला तजुर्बा था।
इन्हें निर्देश दिया गया था कि मार्च से जून के बीच पड़ने वाले नक्सलियों के टैक्टिकल काउंटर आफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) के दौरान महेंद्र कर्मा जैसे बड़े नक्सल विरोधी नेता को निशाना बना कर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई जाए।
सुरक्षा एजेंसियों को मिल रही शुरुआती जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों सीपीआई (माओवाद) कैडरों ने अपने गुरिल्ला दस्ते में 50-50 के अनुपात में लड़के और लड़कियों की भर्ती कर उन्हें सघन गुरिल्ला ट्रेनिंग दी।
खास बात है कि यह दस्ता आई पैड, वॉकी-टॉकी और लैपटॉप जैसे आधुनिक तकनीकी उपकरणों से लैस था। बस्तर में तैनात सीआरपीएफ के अधिकारी ने अमर उजाला को फोन पर हुई बातचीत में बताया कि नक्सलियों का असल निशाना महेंद्र कर्मा थे।
अधिकारी के मुताबिक कुछ नेता तो अंधाधुंध चलाई गई गोलियों का निशाना बने, लेकिन पकड़े गए नेताओं को मारने के फैसले में उनकी आपस में ही अनबन हुई होगी।
अधिकारी के मुताबिक स्थानीय स्तर पर यहां लगभग सभी को मालूम था कि नक्सली बड़ा हमला करने वाले हैं। लेकिन यह हमला इस शक्ल में होगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
अधिकारी ने बताया कि नक्सलियों के साथ सालों से चल रही लड़ाई के कारण सुरक्षा बल भी नक्सलियों के चाल चरित्र को समझने लगे हैं।
यही वजह है कि नक्सलियों के टीसीओसी अवधि की शुरुआत यानी मार्च से ही जंगल की सीमाओं पर सख्ती बढ़ा दी गई थी। ताकि झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश से इनकी आवाजाही को रोका जा सके। लेकिन छत्तीसगढ़ से शीर्ष नक्सली नेताओं ने भीतर ही भीतर नए लड़के लड़कियों का कैडर तैयार कर यह हमला कर दिया।