छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी समस्या कम लागत में उत्पादन करना और पूंजी की आसान उपलब्धता होना है। इसके अलावा छोटा कारोबार होने की वजह से बल्क में बड़े आर्डर मिलना भी आसान नहीं होता है।
ऐसे में एक जैसे कारोबार करने वाले कारोबारी क्लस्टर बनाकर अपनी इस समस्या को दूर कर सकते हैं। क्लस्टर विकसित करने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की तरफ से वित्तीय सहायता के साथ-साथ कारोबारियों को तकनीकी सहायता भी मिलती है।
क्या है योजना
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय माइक्रो एंड स्मॉल वर्ग के तहत आने वाले कारोबारियों के लिए क्लस्टर डेवलपमेंट कार्यक्रम चला रहा है। क्लस्टर के तहत आने वाले कारोबारियों को बैंकों से कर्ज मिलना जहां आसान हो जाता है, वहीं कारोबारियों के लिए रेटिंग जैसी सुविधा सरल हो जाती है। जिसका फायदा उन्हें कारोबारी लागत में कमी आने के रूप में मिलता है।
क्या हैं सुविधाएं
क्लस्टर बनाने के लिए कारोबारियों को उसकी संभावना के अध्ययन, कॉमन सुविधा केंद्र, तकनीकी के इस्तेमाल के लिए सहायता, वर्कशाप, सम्मेलन, प्रशिक्षण केंद्र आदि के लिए योजना के तहत सुविधाएं दी जाती हैं। इसके अलावा, आधारभूत संरचनाओं के लिए 10 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट पर भारत सरकार से 60 फीसदी तक वित्तीय सहायता मिलती है।
कैसे करें आवेदन
किसी क्षेत्र में छोटे कारोबारियों द्वारा क्लस्टर बनाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से या फिर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की स्वायत्त संस्था या क्षेत्रीय संस्थानों द्वारा भेजा जा सकता है। जिसके तहत प्रस्तावों को मंजूरी क्लस्टर डेवलपमेंट कार्यक्रम की स्टीयरिंग कमेटी देती है।
क्या है फायदा
क्लस्टर बनाने से छोटे कारोबारियों को जहां बड़े आर्डर मिलते हैं, वहीं लागत भी कम होती है। किसी खास उत्पाद के लिए जरूरी सभी वेंडर एक जगह एकत्र होने से कारोबार में एकरूपता भी आती है।
प्रमुख क्लस्टर
रेडीमेड गारमेंट, तांबे के बर्तन, राइस मिल, पावरलूम, दवाओं, स्टील फर्नीचर, बिजली उपकरण, कैंची, ऑटो कंपोनेंट, खिलौने आदि प्रमुख क्लस्टर हैं।