केंद्रीय कर्मचारियों को 15 अक्तूबर से पहले अपनी संपत्ति की घोषणा करनी होगी। अगर कोई कर्मचारी बिना किसी उचित कारण के संपत्ति का ब्यौरा प्रस्तुत नहीं करता है या गलत जानकारी देता तो माना जाएगा कि उसने भ्रष्टाचार से संपत्ति अर्जित की है।
केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने आवश्यक दिशा-निर्देशों के साथ संपत्ति की घोषणा के लिए निर्धारित फॉर्म का प्रारूप भी जारी कर दिया है। निर्धारित फॉर्म के जरिये कर्मचारियों को बताना होगा कि उनके पास कितना कैश और बैंक बैलेंस है।
इंश्योरेंस, फिक्स्ड या रिकरिंग डिपॉजिट, शेयर या बॉन्ड, म्युचुअल फंड या किसी अन्य निवेश योजना में पैसा लगाया है तो बताना होगा।
पर्सलन लोन या किसी व्यक्ति, फर्म, कंपनी आदि को एडवांस के रूप में रकम दे रखी है या किसी से उधार ले रखा है तो भी जानकारी देनी होगी। यह भी बताना होगा कर्मचारी जिस वाहन का उपयोग कर रहे हैं, उसकी कीमत, रजिस्ट्रेशन नंबर, वाहन खरीद का वर्ष क्या है।
पूरे परिवार के बारे में देनी होगी जानकारी
जेवर के रूप में सोना, चांदी, महंगी धातुओं एवं स्टोन्स की कीमत एवं वजन सहित जानकारी देनी होगी। इसके अलावा फर्नीचर, एंटीक्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की डिटेल भी बतानी होगी। अगर संपत्ति उत्तराधिकार या गिफ्ट में मिली है तो उस व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी, जिससे संपत्ति प्राप्त हुई।
पूरे परिवार के बारे में देनी होगी जानकारी
कर्मचारी को सिर्फ अपने बारे में नहीं, बल्कि पूरे परिवार के बारे जानकारी देनी होगी। इनमें कर्मचारी के पति या पत्नी एवं बच्चों के रूप में आश्रित शामिल हैं। आश्रितों के नाम कितनी संपत्ति है। कैश और बैंक बैलेंस कितना है, यह भी बताना होगा।
पहली बार दो किस्तों में देना होगा प्रारूप
कर्मचारियों को संपत्ति की घोषणा लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम 2013 के तहत करनी है। पहली बार दो किस्तों में घोषणा करनी होगी। पहली अगस्त 2014 तक संपत्ति की क्या स्थिति थी और उसके बाद 31 मार्च 2015 तक क्या स्थिति रही। दोनों घोषणाएं इस साल 15 अक्तूबर से पहले करनी होंगी। इसके बाद हर साल 31 मार्च तक की स्थिति के बारे में उसी वर्ष 31 जुलाई से पहले घोषणा करनी होगी।