देश को नवीनतम तकनीकी सुविधाओं से लैस एक नया संसद भवन मिल सकता है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इस बारे में शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखा है। दरअसल महाजन के अनुसार वर्तमान संसद भवन भविष्य में बढ़ने वाली जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।
इसलिए उन्होंने नई संसद के निर्माण पर विचार करने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि शहरी विकास मंत्रालय स्पीकर के पत्र पर कैबिनेट के लिए एक नोट तैयार कर सकता है, जहां इस पर विचार होगा। संसद भवन 88 साल पुराना है और महाजन के मुताबिक इसकी सीमित क्षमताओं के कारण दिक्कतें पेश आने लगी हैं।
उन्होंने नई बिल्डिंग के पक्ष में कई तर्क दिए हैं और इसमें सबसे प्रमुख है मौजूदा भवन में बैठने की सीमित जगह होना। भारतीय संविधान की धारा 81 के एक्सप्लेनेशन टू क्लॉज (3) के अनुसार संसद में अंतिम जनगणना की आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
इससे पहले भी आया था सुझाव
अगली जनगणना 2021 में हो सकती है और इसके अनुसार 2026 के बाद लोकसभा में
सीटों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। वर्तमान में सदन में 550 लोग बैठ सकते
हैं और अब इसमें बढ़ोतरी की कोई संभावना नहीं है। महाजन ने लिखा है कि
संसद भवन पुराना हो गया है, जबकि इसमें गतिविधियां बढ़ गई हैं।
1927 में जब
भवन में कामकाज शुरू हुआ, तब सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों की संख्या,
मीडिया के लोगों तथा संसदीय गतिविधियां सीमित थीं। समय के साथ इन चीजों में
इजाफा हुआ है।
वैसे करीब एक साल पहले संसद की बजट समिति की बैठक में भी
इसी तरह का सुझाव आया था।
महाजन ने नए भवन के लिए सुझाईं दो जगहें
स्पीकर
ने नए संसद भवन के लिए दो जगहें भी सुझाई हैं। इनमें से एक जगह वर्तमान
संसद परिसर में ही है। यहां नया भवन बनाने पर कुछ सुविधाओं और सेवाओं को
स्थानांतरित करना पड़ेगा। दूसरी जगह राजपथ के दूसरी तरफ है।
यहां कमोबेश
अधिक जगह है इसलिए नया भवन बनाते समय डिजाइन को लेकर अधिक स्वतंत्रता मिल
सकती है। महाजन ने यह सुझाव भी दिया है कि राजपथ के दूसरी तरफ नए भवन और
वर्तमान भवन को अंडरग्राउंड जोड़ा भी जा सकता है।
महाजन
के सुझावों पर अमल होता है तो नए संसद भवन में आधुनिकतम तकनीकी सुविधाएं
होंगी। सांसदों को नवीनतम गैजेट से लैस किया जाएगा और कोशिश होगी कि संसद
का कामकाज पेपर लेस हो।
संसद का
वर्तमान भवन हेरिटेज ग्रेड-1 की श्रेणी में शामिल है। इस वजह से इसके रख
रखाव और नए निर्माण की कुछ सीमाएं हैं। महाजन ने इसलिए भी नए भवन की वकालत
की है।