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'कश्मीर में सेना नहीं भेजना चाहते थे नेहरू'

Fri, 08 Nov 2013 01:07 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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भाजपा के पितामह लालकृष्ण आडवाणी ने अपने तरकश से प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर एक और सियासी तीर चलाया है।
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आडवाणी ने कहा है कि 1947 में पाकिस्तानी सेना के कश्मीर में घुसने के बावजूद नेहरू वहां सेना भेजने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन उन्हें सरदार बल्लभ भाई पटेल के दबाव के सामने झुकना पड़ा। इसके बाद ही भारतीय सेना कश्मीर में घुस पाई थी।

आडवाणी अपने तरकश से नेहरू पर पटेल को सांप्रदायिक बताने का आरोप लगाकर एक तीर पहले भी चला चुके हैं। आडवाणी का यह लेख भाजपा की उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी नेहरू-पटेल विवाद को तूल देने में जुटी है।
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नरेंद्र मोदी के शुरू किए इस विवाद में अब आडवाणी सबसे ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं। उन्होंने अपने ब्लॉग में सैम मानेकशॉ के एक इंटरव्यू का हवाला देकर यह दावा किया है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मदद से जब कबाइली श्रीनगर के समीप पहुंच गए थे तो सरकार को घाटी में सेना भेजने का निर्णय करना था। नेहरू इसके लिए तैयार नहीं लग रहे थे और वह उस मामले को संयुक्त राष्ट्र ले जाना चाहते थे। तब मानेकशॉ कर्नल थे। मानेकशॉ का यह इंटरव्यू वरिष्ठ पत्रकार प्रेम शंकर झा ने किया था।

आडवाणी ने इसी इंटरव्यू का हवाला देकर कहा कि महाराजा हरि सिंह के विलय के समझौते पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद लार्ड माउंटबेटन ने कैबिनेट की बैठक बुलाई। इसमें नेहरू, पटेल के अलावा रक्षा मंत्री बलदेव सिंह भी मौजूद थे। मानेकशॉ ने सैन्य हालात की जानकारी देने के बाद सुझाव दिया कि सेना को घाटी में आगे बढ़ना चाहिए।

आडवाणी ने इंटरव्यू के हवाला देते हुए कहा नेहरू हमेशा की तरह संयुक्त राष्ट्र, रूस, अफ्रीका, ईश्वर और हर किसी की उस समय तक बात करते रहे, जब तक कि सरदार पटेल ने अपना आपा नहीं खो दिया।

पटेल ने कहा, जवाहरलाल आप कश्मीर चाहते हैं या उसे गंवाना चाहते हैं। इस पर नेहरू ने कहा कि निस्संदेह वह कश्मीर चाहते हैं। तब पटेल ने कहा कि मेहरबानी करके आदेश दीजिए।
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इससे पहले कि नेहरू कुछ कहते, सरदार पटेल मानेकशॉ की तरफ पलटे और कहा कि आपको आदेश मिल चुका है। आडवाणी ने कहा कि इसके बाद ही सेना को पाकिस्तानी कबाइलियों से मोर्चा लेने के लिए विमानों से श्रीनगर भेजा गया।
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