लद्दाख क्षेत्र में चीनी घुसपैठ मामले पर संसद में आक्रामक रुख अख्तियार करने वाले प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए ने अब इस मुद्दे पर यूपीए सरकार को सत्ता छोड़ने को कहा है।
लोकसभा चुनाव के मूड में आ चुके एनडीए ने सरकार से दो टूक कहा है कि वह या तो घुसपैठ हटाए या फिर दिल्ली की गद्दी छोड़ दे।
घुसपैठ व सरबजीत मामले में यूपीए सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एनडीए ने शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
गठबंधन के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में एनडीए सांसदों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भी दिया। एनडीए ने विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की चीन यात्रा पर सरकार को फिर आगाह किया है।
बाद में आडवाणी ने कहा कि चीनी घुसपैठ को प्रधानमंत्री स्थानीय घटना कह रहे हैं, लेकिन सरकार का यह कथन अपनी जिम्मेदारी से भागने जैसा ही है।
उन्होंने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि चीन ने 1962 में भी ऐसी ही घुसपैठ की थी, जो बाद में दोनों देशों के बीच युद्ध का कारण बनी।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने दोहराया कि जब तक चीन अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता है, तब तक विदेश मंत्री को चीन की यात्रा पर नहीं जाना चाहिए। उन्होंने चीन सीमा पर आईटीबीपी की जगह सेना की तैनाती की मांग की है।
एनडीए ने पाकिस्तानी जेल में मारे गए भारतीय कैदी सरबजीत की मामले में भी यूपीए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
आडवाणी ने कहा कि सबसे दुखद यह है कि केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और संबंधित अफसरों ने इस मामले पर नजर नहीं रखी।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। राष्ट्रपति से मिलने गए सांसदों में एनडीए के संयोजक शरद यादव, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली समेत सभी घटक दलों के सांसद भी मौजूद थे।