कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी के खिलाफ पितृत्व मामले के ट्रायल को सुप्रीम कोर्ट ने तेजी से निपटाए जाने का आदेश दिया है।
पुत्र होने का दावा करने वाले रोहित शेखर की ओर से दायर मामले पर हाईकोर्ट में इस संबंध में ट्रायल लंबित है। वहीं सर्वोच्च अदालत ने तिवारी की ओर से दायर उस याचिका बेवजह करार देते हुए निपटारा कर दिया जिसमें हाईकोर्ट के डीएनए टेस्ट कराने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
दरअसल शीर्ष अदालत ने तिवारी की याचिका पर 14 मार्च को कोई भी आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था। लेकिन उनकी याचिका को लंबित रखा था। गौरतलब है कि अब तिवारी का डीएनए टेस्ट हो चुका है।
जस्टिस आफताब आलम की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष रोहित की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने कहा कि पितृत्व का यह मुद्दा कई वर्षों से चल रहा है।
इस दौरान रोहित की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। उनकी मां को भी इस बात की चिंता है कि यदि ट्रायल का निपटारा तेजी से न हुआ तो उनके बेटे की हालत और बिगड़ती जाएगी।
सर्वोच्च अदालत ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए हाईकोर्ट को मामले को जल्द निपटाने का निर्देश दिया। हालांकि तिवारी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत के इस आदेश पर आपत्ति जताई। लेकिन पीठ ने उस आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया।