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इन मुद्दों पर होगा मोदी-शरीफ का आमना-सामना!

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भारत आने की पुष्टि होते ही दोनों देशों के बीच बातचीत के मुद्दे तय होने लगे हैं।
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शरीफ और मोदी की अगुवाई में जिन मुद्दों पर बातचीत की संभावना है उनमें सीमा पार से आतंकवाद, कश्मीर, मुंबई हमलों के आतंकवादियों के खिलाफ तेज कार्रवाई और नियंत्रण रेखा पर शांति बहाली शामिल हैं।

भारत ने पिछले साल जम्मू और कश्मीर में अपने सैनिकों के सिर काट लिए जाने के बाद पाकिस्तान के साथ समग्र बातचीत की प्रक्रिया रोक दी थी। हालांकि पाकिस्तान ने बाद में सफाई दी थी कि इस मामले में उसकी सेना शामिल नहीं थी।
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कश्मीर मुद्दे पर भी हो सकती है बात

बहरहाल, दोनों पक्षों की बातचीत में कोई अहम फैसला होने की उम्मीद तो नहीं है लेकिन इससे दोनों के बीच जारी गतिरोध टूट सकता है। आपस में विश्वास बहाली के कदम उठाए जाने से समग्र बातचीत के जारी रखने में मदद मिल सकती है।

द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देशों के आवाम के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने, नए सरल वीजा नियमों को लागू करने और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। दोनों ओर से इन मुद्दों को परवान चढ़ाने और रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जा सकती है।

दोनों देशों के संयुक्त आयोगों के तहत बने कार्य दलों की बैठकों को रफ्तार देने पर भी बातचीत हो सकती है। ये कार्य दल बिजली, पेट्रोलियम और व्यापार के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। नवाज और मोदी के बीच 27 तारीख की बातचीत में कश्मीर का मुद्दा भी उठ सकता है।

व्यापार‌िक मुद्दों पर होगी बातचीत

हाल में भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा था कि दोनों देश जम्मू-कश्मीर को एक मुद्दा मानने को तैयार हो सकते हैं और इसे बातचीत के जरिये हल करने की इच्छाशक्ति जता सकते हैं।

भारत अपने यहां के मोस्ट वांटेड आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को सौंपने का मुद्दा भी उठा सकता है। आपसी कारोबार को बढ़ावा देने के लिए भुगतान की गारंटी जरूरी है। इसके अलावा बैंक चैनलों को भी सुधारना पड़ता है।

वर्ष 2005 में रिजर्व बैंक के गवर्नर और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके मुताबिक भारत में पाकिस्तानी बैंकों की दो शाखाएं और पाकिस्तान में भारतीय बैंकों की दो शाखाएं खोली जानी थीं।

खोली जाएंगी बैंक की शाखाएं

लेकिन दोनों देश के बैंकों की ओर से शाखाएं खोलने के आवेदन देने पर भी इस पर अमल नहीं हुआ है। इस बार की बातचीत में यह मुद्दा उठ सकता है। वर्ष 2012 में पाकिस्तान ने वस्तुओं को परमिट देने के मामले में पॉजीटिव लिस्ट व्यवस्था के बदले निगेटिव लिस्ट व्यवस्था अपना ली।

इसके तहत सिर्फ 1029 भारतीय आइटमों के आयात को ही रोकने की व्यवस्था बनी। लेकिन पाकिस्तान अब भी भारत को सर्वाधिक तरजीही देश का दर्जा नहीं दे सका है।

वह यह दर्जा देता है तो भारत को वो सारी सहूलियतें हासिल हो जाएंगी जो पाकिस्तान के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों को मिल रही हैं। भारत पाकिस्तान को 1996 में एमएफएन का दर्जा दे चुका है।

25 करोड़ से लेकर 3 अरब डॉलर का कारोबार

अगस्त 2012 में भारत ने रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा को छोड़ कर पाकिस्तानी निवेश का रास्ता सभी क्षेत्रों के लिए खोल दिया था। दोनों देशों के बीच प्रतिबंधात्मक कारोबारी व्यवस्था की वजह से अनौपचारिक रास्ते से कारोबार हो रहा है।

इसमें दुबई जैसे तीसरे देश के जरिये व्यापार शामिल है। इस रास्ते के जरिये दोनों देश के बीच 25 करोड़ से लेकर तीन अरब डॉलर तक के कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है।

बहरहाल भारत और पाकिस्तान के बीच 2003 से ही संघर्ष विराम की शर्तों का उल्लंघन होता रहा है। लेकिन पिछले साल के सीजफायर उल्लंघन के बाद बातचीत पटरी से उतर गई। इसी तरह भारत को एमएफएन का दर्जा देने का मामला लटका हुआ है।
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क्या मोदी से वादों पर खरे उतर पाएंगे नवाज

भारत इस मामले में तेजी से आगे बढ़ना चाहेगा। दोनों देशों के बीच बातचीत में अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों की वापसी के बाद की सुरक्षा स्थितियों पर भी बात होगी। मुंबई हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव रहा है।

भारत का कहना है कि यह हमला पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के इशारे पर किया गया था। पिछले साल सत्ता में आने पर शरीफ ने भारत से रिश्ते सुधारने की बात कही थी लेकिन कट्टरपंथियों खासकर पाकिस्तानी सेना के बीच के ऐसे तत्वों के खिलाफ वह कड़ा रुख अपनाने में नाकाम रहे हैं।
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