रसोई गैस डीलरों ने तमाम मांगों को लेकर 25 फरवरी से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की है।
फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन ने सामूहिक तौर पर इसका निर्णय लिया है।
संगठनों का कहना है कि तेल कंपनियों की गलत और एकतरफा नीतियों के कारण देश में एलपीजी वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के महासचिव पवन सोनी का कहना है कि सरकार ने आधार लिंक एलपीजी सब्सिडी योजना को लंबित करने के बाद आगे की रणनीति का खुलासा नहीं किया है। फरवरी माह से नकद सब्सिडी देना बंद कर दिया गया है। ऐसे में डीलरों को उपभोक्ताओं के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। लेकिन मंत्रालय ने चुप्पी साध रखी है।
उन्होंने कहा कि गलत नीतियों के कारण 15 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं और 12,600 वितरकों की मुश्किलें बढ़ी हैं। तेल कंपनियों ने पेट्रोलियम मंत्रालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए 3465 डिस्ट्रीब्यूटरों के लिए विज्ञापन निकाला जबकि मंत्रालय की ओर से 2794 के लिए विज्ञापन देने को कहा गया था।
कंपनियों ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की कीमत पर सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षण बढ़ा दिया है।
फेडरेशन के मुताबिक कंपनियां विकलांग कोटा से खिलवाड़ करते हुए इसी श्रेणी में खिलाड़ियों और स्वतंत्रता सेनानियों को भी जोड़ रही हैं। जो कि पूरी तरह से गलत है। जबकि पारदर्शिता से संबंधित ऐसी कई और खामियां भी हैं। सील प्रूफ एलपीजी सिलेंडर की व्यवस्था और नई एजेंसी संबंधी खामियों को दूर करने पर सरकार का ध्यान नहीं है।