महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले में तमाम वर्ग की जिम्मेदारी तय करने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग एक विशेष दिशा निर्देश तैयार कर रहा है। इस दिशा निर्देश का पालन भविष्य में पुलिस, मजिस्ट्रेट, अस्पताल, एनजीओ और मीडिया को करना होगा। मामले की संवेदनशीलता समझते हुए उन्हें यह मालूम हो सकेगा कि पीड़ित महिला के साथ उन्हें किस तरह पेश आना है।
दरअसल, दिल्ली के गैंग रेप मामले में पीड़ित का पहला बयान लेने में जिस तरह से मजिस्ट्रेट और दिल्ली पुलिस के बीच नोंक झोंक हुई, उसे देखते हुए महिला आयोग ने अब ऐसे मामलों में ऐहतियात के लिए इस तरह के दिशा निर्देश तैयार करने का फैसला किया है।
पीड़िता से कैसे पेश आए पुलिस
फिलहाल देश में बलात्कार के मामले में पीड़ित के साथ बात, व्यवहार और उसकी देख-रेख व सहायता के लिए कोई विशेष दिशानिर्देश नहीं है। मगर अब आयोग की इस पहल से इससे संबंधित कई पक्षों की जिम्मेदारी तय हो सकेगी। सूत्रों के मुताबिक नए दिशा निर्देश से पुलिस को पीड़ित की रिपोर्ट लिखते हुए किस तरह के सवाल करने चाहिए, किस तरह से उन्हें पेश आना चाहिए, इसकी जानकारी उन्हें मिल सकेगी।
मजिस्ट्रेट के लिए कुछ जिम्मेदारियां
अस्पतालों में भी डॉक्टर और नर्स की महत्वपूर्ण भूमिका को और सकारात्मक बनाने, एनजीओ के जरिए इन मामलों को सही मंच तक ले जाने, पीड़ित को सकारात्मक माहौल देते हुए कैसे बर्ताव किया जाए और मीडिया को संवेदनशील मामले में रिपोर्टिंग के तरीके से जुड़े मापदंड तय होंगे। पीड़ित के बयान रिकॉर्डिंग से जुड़े मामले में मजिस्ट्रेट के लिए कुछ जिम्मेदारियां इस दिशा निर्देश के जरिए तय की जाएंगी।
दिशानिर्देश जारी करने के लिए राज्य सरकारें रजामंद
राष्ट्रीय महिला आयोग के सूत्रों के मुताबिक इस दिशानिर्देश को पहले पहल जनवरी के पहले सप्ताह में हरियाणा में जारी किया जाएगा। जबकि जनवरी अंत तक इसे मध्यप्रदेश में राज्य सरकार जारी करेगी। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि इस दिशानिर्देश को जारी करने के लिए राज्य सरकारें रजामंद है। जल्द ही इस दिशानिर्देश को देश भर में जारी करने की योजना है। इससे पहले ही राष्ट्रीय महिला आयोग सरकार से बलात्कार के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ट्रेनिंग शुरू करने की सिफारिश कर चुका है। मगर केंद्र की ओर से इस ओर से अभी तक सक्रियता नहीं दिखाई गई है।