सियासी विवाद के बवंडर में घिरे नेशनल हेराल्ड की पुरानी स्वामित्व कंपनी एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड में सिने अभिनेता अमिताभ बच्चन भी शेयर होल्डर हैं। मगर बालीवुड के महानायक भी उन तमाम शेयर होल्डरों में शामिल हैं जिन्हें एजेएल की उस बोर्ड बैठक की सूचना नहीं दी गई जिसमें नवगठित यंग इंडियन कंपनी को उसका अधिकांश शेयर ट्रांसफर किया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पास 76 फीसदी शेयर के साथ यंग इंडियन कंपनी का लगभग पूर्ण स्वामित्व है। एजेएल को इस यंग इंडियन कंपनी के सुपुर्द किए जाने के मामले में ही सुब्रमणयम स्वामी की याचिका पर सोनिया और राहुल को अदालत में पेश होने का नोटिस जारी हुआ है।
संसद में जारी मौजूदा राजनीतिक गतिरोध की वजह बने इस विवाद में कांग्रेस इसे गांधी परिवार के खिलाफ सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताने में जुटी है। कंपनी मामलों के मंत्रालय से जुड़े उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार अमिताभ बच्चन के एसोसिएटेड जनरल में शेयरों की संख्या अच्छी खासी है।
नेहरू के समय स्थापित हुई थी कंपनी
कंपनी के कायदों के हिसाब से बोर्ड के लिए सभी शेयर होल्डरों को इसकी सूचना
दी जानी चाहिए। मगर बालीवुड महानायक से जुड़े करीबी सूत्रों से सरकारी
महकमे को इस बात की पुख्ता जानकारी हासिल हुई है कि अमिताभ को भी बोर्ड
बैठक की कोई सूचना नहीं भेजी गई थी।
बच्चन परिवार ने एसोसिएटेड जनरल में
शेयर तब लिया था जब गांधी परिवार के साथ उसके बेहद करीबी रिश्ते थे। वैसे
शांति भूषण, जस्टिस मार्कंडेय काटजू समेत कुछ अन्य लोगों ने जिनके शेयर
एजेएल में थे पहले ही कहा है कि उन्हें कंपनी के दिसंबर 2010 की बैठक की
जानकारी ही नहीं भेजी गई जिसमें यंग इंडियन को एसोसिएटेड जरनल का स्वामित्व
देने का फैसला हुआ।
सरकारी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस चाहे इस मसले को
कितना ही राजनीतिक तूल देने की कोशिश करे मगर धीरे-धीरे सामने आ रहे एजेएल
के शेयर होल्डर्स की शिकायतें उसकी कानूनी मुसीबतें बढ़ाएंगी ही। पंडित
जवाहरलाल नेहरू के समय गैर लाभकारी सेक्शन 25 कंपनी के रुप में स्थापित
एसोसिएटेड जरनल ही नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करती थी। इस कंपनी की
देनदारी चुकाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने 2008 से मार्च 2010 के बीच करीब
90 करोड़ रुपए का कर्ज दिया।
2011 में सोनिया और राहुल हुए कंपनी में शामिल
कांग्रेस ने दिसंबर 2010 में यंग इंडियन कंपनी
को एजेएल को दिए अपने कर्ज का हकदार बना दिया। यानी कांग्रेस के पैसे की
मालिक यंग इंडियन बन गई।
यंग इंडियन कंपनी का गठन नवंबर 2010 में गांधी
परिवार के दो करीबियों सुमन दुबे और सैम पित्रोदा के बतौर निदेशक बनने के
साथ हुआ। राहुल गांधी दिसंबर 2010 तो सोनिया गांधी जनवरी 2011 में इस कंपनी
में बतौर निदेशक शामिल हुई हैं। इसी यंग इंडियन ने एजेएल को 50 लाख रुपए
देकर 90 करोड़ कर्ज समेत उसकी पूरी संपत्ति का मालिकाना हक ले लिया।
जबकि
एजेएल के पास दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, चंडीगढ समेत तमाम बड़े शहरों में
अनुमानों के हिसाब से 2 हजार करोड रुपए से ज्यादा की संपदा बताई जाती है।