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एनजीटी ने पूछा, 'शिवलिंग पर क्यों छोड़ी जा रही है गंदगी'

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पूरी तरह प्रतिबंध के बावजूद हरिद्वार में गंगा घाटों पर हर जगह प्लास्टिक और पॉलीथिन बिखरे पड़े हैं। अब तक आपने इस संबंध में क्या कार्रवाई की है?
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गंगा नदी में बिना शोधित किए हुए अपशिष्ट (सीवेज) छोड़ने के मामले पर प्रधान पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आस्थावान लोग सोचते हैं कि वे रोजाना शिवलिंग पर पवित्र गंगा जल चढ़ाते हैं जबकि वे यह नहीं जानते कि यह अपशिष्ट युक्त जल है।

बेंच ने तल्ख अंदाज में पूछा कि क्या आप पवित्र शब्द का अर्थ जानते हैं? लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ मत करिये। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने तल्ख टिप्पणी के साथ एक सप्ताह के भीतर सरकार से विकास का एक्शन प्लान मांगा है। इसमें सरकार को शहरीकरण और आबादी जैसे पहलुओं को भी शामिल करना होगा।
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जनवरी 2016 में होना है अर्धकुंभ का आयोजन

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मंगलवार को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान हरिद्वार के एडीएम व अन्य अधिकारी भी पेश हुए।

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने एसटीपी पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जनवरी 2016 में अर्धकुंभ का आयोजन होना है, इससे पहले 40 एमएलडी के अतिरिक्त सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की व्यवस्था कर दी जाएगी।

बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा कि बिना अनुमति के चलने वाले होटलों से निकलने वाले अपशिष्ट की रोकथाम के लिए आखिर क्या कार्रवाई हुई है। इसका जवाब वे नहीं दे पाए।
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अभी तक महज 10 लोगों का ही चालान

प्रतिबंध के बावजूद हरकी पैड़ी और अन्य गंगा घाटों पर प्लास्टिक-पॉलीथिन का इस्तेमाल हो रहा है। मौजूद एडीएम ने इस बात को बेंच के सामने स्वीकारा है। महज 10 लोगों का ही अब तक 5000 रुपये का चालान किया गया है।

उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेश अधिकारी ने कहा वे बिना अनुमति वाले होटल पर कार्रवाई करना चाहते हैं। इस पर बेंच ने उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश वकील से कहा कि प्रदूषण बोर्ड कार्रवाई करना चाहता है लेकिन सरकार के दबाव में वह कार्रवाई कर पाने में अक्षम है।

ग्रीन बेंच ने सरकार की ओर से पेश वकील और अधिकारियों से कहा कि आपने बिना प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के चलने वाले एक दो होटलों पर भी कार्रवाई की होती तो आप जवाब दे पाते। जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कहा मैं भी हरिद्वार गया हूं। गंगा घाटों के आसपास 32 होटल चल रहे हैं। घाटों पर कूड़ा-कचरा फैला रहता है। आखिर आप लोग क्या कर रहे हैं।
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