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भारतीय सैनिकों से इशारों में चाकलेट मांगते हैं चीनी

Sun, 24 Mar 2013 08:42 PM IST
नाथूला दर्रे से आशीष तिवारी
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भारत-चीन के बार्डर पर तकरीबन साढ़े चौदह हजार फीट की ऊंचाई वाले नाथूला दर्रे पर माइनस में पारा पहले से ही था। तभी अचानक बर्फबारी शुरू हो गई।
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बर्फ के साथ तेज तूफान शुरू होने लगा तो चीन से लगती भारतीय सरहदों की हिफाजत करने वाले जवानों ने वहां मौजूद लोगों को उनकी जान का खतरा बताते हुए तुरंत ही लौट जाने को कहा।

ऐसी विपरीत परिस्थितियों में अमर उजाला शुक्रवार सुबह 11 बजे अपने देश के सैनिकों के साथ नाथूला दर्रे पर था। उस समय बर्फबारी के चलते वहां पर जीरो विजिबिलिटी थी।
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मौजूद सैनिकों ने बताया कि यहां पर गर्मियों में भी ऐसा ही मौसम रहता है। रात के समय तो पारा माइनस बीस डिग्र्री से भी नीचे पहुंच जाता है।

भारतीय जवानों ने बताया कि हम लोग हर वक्त अलर्ट तो रहते हैं लेकिन रोज ही आंखों के सामने रहने वाले दुश्मन से एक अलग तरह का प्रेम भी करते हैं।

तभी तो चीनी सैनिकों से इशारों में होने वाली बातचीत में उनकी मांग पर कभी चाकलेट तो कभी बिस्किट दे देते हैं।

भारतीय सैनिकों ने बताया कि जब से व्यापारिक गतिविधियां इस दर्रे से शुरू हुई हैं, तब से ही पर्यटकों का आना-जाना बढ़ा है।

भारत चीन युद्ध के बाद बंद हुए इस दर्रे को तकरीबन 44 साल बाद 2006 में भारत और चीन की व्यापारिक गतिविधियों के लिए शुरू किया गया है।

तीन सौ सत्तर, चक्क दे पुत्तर
तीन सौ सत्तर, चक्क दे पुत्तर...एक गोली एक दुश्मन...शस्त्र से शक्ति। दुश्मनों के छक्के छुड़ा देने वाले ऐसे न जाने कितने वाकया नाथूला दर्रे पर मौजूद सेना के जवानों ने जगह-जगह पर लिखे हैं।
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इस मौसम में गंगटोक से नाथूला पास तक जाने में पड़ने वाले तकरीबन 25 किलोमीटर के बर्फीले रेगिस्तान को पार करने के दौरान ये जोशीले वाक्य हर वक्त देश के दुश्मनों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
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