अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान वार्टन स्कूल की ओर से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन रद्द कर अपमान किए जाने को लेकर भारत में उनके समर्थकों में जबरदस्त गुस्सा है।
इस घटना के बाद शिवसेना के नेता सुरेश प्रभु ने कहा है कि वह अब वार्टन स्कूल नहीं जाएंगे।
वहीं, अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत करने से इंकार कर दिया है।
हालांकि भाजपा अपने गुस्से का खुलकर इजहार नहीं कर इस घटना को तूल देने से बच रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने सोमवार को कहा कि मैंने विरोध के तौर पर अपनी यात्रा रद्द कर दी है। उन्होंने कहा कि मोदी को वार्टन स्कूल से न्योता दिया गया था। मोदी खुद न्योता मांगने उनके पास नहीं गए थे।
अगर अब उनका संबोधन रद्द किया गया है तो यह गुजरात के मुख्यमंत्री का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान है। वहीं, अदानी समूह के प्रवक्ता ने कहा कि गौतम अदानी व्यस्तता के चलते इस कार्यक्रम में शिरकत करने की असमर्थता पहले ही जाहिर कर चुके हैं।
अदानी समूह ही वार्टन स्कूल में इस कार्यक्रम का प्रमुख प्रायोजक है। व्हार्टन इंडिया इकोनॉमिक फोरम ने इस महीने की 23 तारीख को मोदी को संबोधन के लिए आमंत्रित किया था।
मोदी का यह संबोधन फिलाडेल्फिया में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होना था। लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया के तीन भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसरों के ऐतराज जताने के बाद उनके संबोधन को रद्द कर दिया गया।
मालूम हो कि इन प्रोफेसरों और कई छात्रों ने गुजरात दंगों के बाद बनी मोदी की छवि को लेकर सवाल उठाए थे और उन्हें कार्यक्रम में मुख्य वक्ता बनाए जाने पर ऐतराज जाहिर किया था।
इस बढ़ते विरोध के मद्देनजर फोरम ने कहा कि हम मोदी के विकास मॉडल के प्रशंसक हैं, लेकिन हमें संबोधन रद्द करने का फैसला लेना पड़ रहा है।
तीन भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसरों ने जताया था ऐतराज
यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया के तीन भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसरों के ऐतराज पर मोदी का वार्टन स्कूल में संबोधन रद्द किया गया।
इन तीन प्रोफेसरों में तूरजो घोष, आनिया लूंबा और सुवीर कॉल शामिल हैं। अपनी मांग के समर्थन में इन प्रोफसरों ने 135 लोगों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र फोरम को भेजा था।
दिलचस्प यह है कि इस पर हस्ताक्षर करने वालों में वार्टन स्कूल का एक भी प्रोफेसर शामिल नहीं है। वार्टन स्कूल यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया का ही हिस्सा है।
मोदी देश में बेहद लोकप्रिय नेता हैं। दुनिया भर में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। उन्हें किसी अंतरराष्ट्रीय फोरम से सर्टिफिकेट हासिल करने की कोई जरूरत नहीं है। मोदी ने वार्टन स्कूल में बोलने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया था, बल्कि वहीं से उन्हें न्योता दिया गया था।
शाहनवाज हुसैन, भाजपा