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मोदी के लिए ब्रिटेन ने खोले दरवाजे, देश आने का न्योता

Tue, 13 Aug 2013 07:46 PM IST
नई दिल्ली/लंदन/एजेंसी
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दोबारा रिश्ते कायम करने के लगभग 10 माह बाद ब्रिटेन के कुछ शीर्ष नेताओं ने उन्हें अपने यहां आने का न्यौता भेजा है। यह बुलावा वहां की दोनों शीर्ष पार्टियों के भारतीय समूहों की ओर से आया है।
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2002 में गुजरात दंगों के बाद अमेरिका की तरह ब्रिटेन ने भी मोदी से सभी प्रकार के संबंध खत्म कर लिए थे। लेकिन 10 माह पहले उसने मोदी के साथ फिर से संबंध बनाने का निर्णय लिया। दूसरी ओर अमेरिका अब भी अपने पुराने रुख पर कायम है।

ब्रिटेन की ओर से यह कदम मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी के ‘लेबर फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ के चेयरमैन और सांसद बैरी गार्डनर ने बढ़ाया है।

उन्होंने पिछले सप्ताह आठ अगस्त को मोदी को एक खत लिखकर ब्रिटिश संसद के निम्न सदन हाउस ऑफ कामंस में ‘आधुनिक भारत का भविष्य’ विषय पर बोलने का न्योता दिया।
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उन्होंने कहा, 'यह न्योता लेबर पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और नरेंद्र मोदी के बीच पिछले कुछ साल से रहे बेहतर संबंधों का नतीजा है। मुझे लगता है कि ब्रिटेन और खासकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लोग नरेंद्र मोदी को सुनने के लिए काफी उत्सुक होंगे।'

बकौल गार्डनर, 'मोदी ऐसे नेता हैं, जिन्हें आप खारिज नहीं कर सकते। मुझे लगता है कि मोदी से मेल मिलाप करने में ही ब्रिटेन का सर्वोत्तम हित है, क्योंकि वह गुजरात के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ भारत के संभावित प्रधानमंत्री भी हैं। मैं चाहता हूं कि लेबर पार्टी के मेरे बहुत से साथी ब्रिटेन में मोदी का स्वागत करने के लिए आगे आएं।'

इसके ठीक एक दिन बाद नौ अगस्त को ऐसा ही एक खत सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी के ‘कंजरवेटिव फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ ने भी मोदी को लिखा। जिसमें उन्हें ब्रिटेन आने का न्योता दिया गया।

कंजरवेटिव फ्रेंड्स ऑफ इंडिया के सह-अध्यक्ष और सांसद शैलेश वारा ने खत में विशेष नोट लिखकर मोदी से मिलने की इच्छा जताई है।

उन्होंने कहा कि आपके लिए कार्यक्रम आयोजित करना हमारे लिए सम्मान की बात होगी। मुझे पूरी आशा है कि जब भी आपको मौका मिलेगा आप ब्रिटेन जरूर आएंगे।

मोदी पर पक्ष विपक्ष एक
उल्लेखनीय है कि लोकतंत्र में बहुत कम मौकों पर ऐसा देखने को मिलता है कि जब किसी मसले पर पक्ष और विपक्ष एक साथ खड़े नजर आएं। लेकिन ब्रिटेन में मोदी को लेकर ऐसा नहीं दिखा। उन्हें ब्रिटेन बुलाने के मसले पर दोनों दल एक सुर में बोलते नजर आए और दोनों कंजरवेटिव व लेबर दोनों पार्टिंयों ने उन्हें बुलावे का खत लिखा।
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