नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने के लिए सभी नेताओं को रजामंद करने में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह सुरेश सोनी के शनिवार पणजी पहुंचने के बाद बैठकों को जो दौर शुरू हुआ वह देर रात तक चलता रहा।
रात भर बैठक करने के बाद राजनाथ ने रविवार सुबह दिल्ली में ‘बीमार’ लालकृष्ण आडवाणी से फोन पर बात की और उन्हें जानकारी दी कि वे मोदी को लेकर ऐलान करने जा रहे है।
अटल-आडवाणी युग का अंत?
सूत्रों के अनुसार आडवाणी अंत तक अपने रुख से नहीं पलटे। यहां तक कि उन्होंने ब्लॉग तो लिखा, लेकिन मोदी के पक्ष में दो लाइनें लिखने की आवश्यकता नहीं समझी।
ब्लॉग में आडवाणी ने हिटलर के हश्र का जिक्र कर दिया, जिसे मोदी पर कटाक्ष माना जा रहा है।
शनिवार को कार्यकारिणी की बैठक के बाद मोदी को लेकर भाजपा नेताओं के बीच बैठकों का दौर शुरू हुआ। राजनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह और मनोहर पारिकर से अलग-अलग बात की। सभी ने मोदी के पक्ष में हामी भर दी।
राहुल vs मोदी: किसमें है दम
संघ नेता सोनी के साथ भी वरिष्ठ नेताओं की बैठकों का दौर चलता रहा। सोनी ने संघ की ओर से मोदी के नाम पर हरी झंडी दिखा दी।
इसके बाद भी सुषमा स्वराज, अनंत कुमार और वेंकैया नायडू चाहते थे कि आडवाणी की अनुपस्थिति में मोदी के नाम का ऐलान न किया जाए, लेकिन राजनाथ लगातार कार्यकर्ताओं की भावनाओं का हवाला देते रहे।
राजनाथ कहते रहे कि लोकसभा चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है। अगर अब भी ऐलान नहीं किया गया तो कार्यकर्ता विद्रोह करने लगेंगे।
यूपी में होगी असली परीक्षा
दिल्ली में आडवाणी के निवास पर प्रदर्शन हो चुका था, इसलिए उनके समर्थक नेताओं के तेवर बाद में नरम पड़ते चले गए। शनिवार रात लगभग एक बजे तक बैठकों का दौर चलता रहा और अंतत: नतीजा मोदी के पक्ष में गया।