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सत्ता बदलते ही सावरकर आए याद, श्रद्धांजलि को उमड़ी भीड़

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सत्ता बदलते ही स्वतंत्रता सेनानी रहे विनायक दामोदर सावरकर के दिन भी बहुर गए। संसद के सेंट्रल हॉल में उनकी जयंती पर बीते करीब एक दशक से जारी वीरानी सत्ता बदलते ही बहार में बदल गई।
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बुधवार को न केवल पीएम नरेंद्र मोदी, उनके कैबिनेट सहयोगियों, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, वर्तमान तथा पूर्व सांसदों ने सेंट्रल हॉल पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी, बल्कि डीडी न्यूज पर दोपहर में उनकी पूरी जीवनी गाथा पढ़ी गई।

बीते साल आडवाणी के अलावा कोई नहीं था

लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय भी पूरी तरह सतर्क दिखा और इस दौरान सावरकर के जीवन वृत्त वाली पुस्तिका भी बांटी गई। बीते साल सावरकर को श्रद्धांजलि देने में न तो सरकार ने रुचि दिखाई थी और न ही भाजपा के सांसदों को ही उनकी याद आई थी।

सेंट्रल हॉल पहुंच कर सावरकर को श्रद्धांजलि देने वालों में अकेले आडवाणी शामिल थे। हालत यह थी कि लोकसभा और राज्य सभा के महासचिवों तक ने कार्यक्रम में उपस्थित होना जरूरी नहीं समझा था।

संसद भवन में साफ तौर पर बदलाव द‌िखा

सरकार की ओर से एक प्रतिनिधि तक उपस्थित न होने पर आडवाणी ने तब न केवल गहरी नाराजगी जताई थी, बल्कि इस मामले को लोकसभा में भी उठाया था। केंद्र की सत्ता में आए बदलाव का साफ असर बुधवार को संसद भवन में भी साफ तौर पर दिखा।

संघ की विचाराधारा वाले स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की जयंती पर एक दशक बाद सेंट्रल हॉल में श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ी भीड़ इस बदलाव की साफ गवाही दे रही थी।
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सावरकर के च‌ित्र पर चढ़ाया फूल

खुद पीएम मोदी अपने कैबिनेट के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ सुबह 10.30 बजे सेंट्रल हॉल पहुंचे और सावरकर के चित्र पर फूल चढ़ा कर श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान आडवाणी, केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, गोपीनाथ मुंडे, संतोष गंगवार, डॉ हर्षवर्धन सहित कई मंत्री और सांसदों और पूर्व सांसदों की फौज सेंट्रल हॉल में डटी दिखाई दी।
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