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क्यों नहीं खत्म हो रहा नरेंद्र मोदी का गुजरात प्रेम?

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भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो के उपग्रह मंगलयान ने बुधवार को मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश किया, जिसके चंद ही मिनट बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, 'आशा है कि प्रधानमंत्री स्टेट्समैन जैसा व्यवहार करेंगे।' प्रधानमंत्री मंगलयान की कामयाबी के बाद वैसा व्यवहार कर पाए या नहीं, इसे तय करने की जिम्मेदारी वक्त को दे देना ही बेहतर होगा।
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हालांकि उन्होंने इसरो में दिए अपने भाषण में एक बार फिर गुजरात के योगदान की तारीफ कर ऐसे लोगों को नाराज होने का एक और मौका दे दिया, जो प्रधानमंत्री के 'अति-गुजरात-प्रेम' से खुन्नस खाए रहते हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि मार्स ऑर्बिटर का निर्माण देश में ही किया गया। बंगलौर से भुवनेश्वर तक और फरीदाबाद से राजकोट तक, यह भारत का सामूहिक प्रयास था।
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मार्स ऑर्बिटर में गुजरात के योगदान का उल्‍लेख किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के योगदान का विस्तार से उल्‍लेख किया। उन्होंने बताया कि मार्स ऑर्बिटर में लगा 'मिथेन सेंसर' गुजरात में बनाया गया है।

मोदी ने संस्‍मरण सुनाने के अंदाज में बताया कि राजकोट में कुछ वैज्ञान‌िकों ने एक प्रयोगशाला में लगातार कई दिनों तक मेहनत करके ये सेंसर बनाया। जब वे वहां काम कर रहे ‌थे, कोई उनसे मिलने भी नहीं जाता था।

मोदी ने कहा, 'एक दिन मेरी जिज्ञासा हुई कि मैं जाकर देखूं कि वे क्या काम कर रहे हैं। मैं राजकोट गया और उन वैज्ञानिकों से मिला, बात की। मुझे वही पता चला की मंगल पर मिथेन है, इसका पता लगाने के लिए औजार गुजरात में बनाया जा रहा है।'

जापान में भी मोदी नहीं भूले थे गुजरात को

मोदी के भाषण में गुजरात का ऐसा उल्लेख होने के बाद एक बार ये सवाल उठा कि प्रधानमंत्री गुजरात प्रेम से कब बाहर आएंगे?

राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि मार्स ऑर्बिटर के निर्माण में देश भर के वैज्ञानिकों का योगदान ‌था, ल‌ेकिन गुजरात का विशेष उल्लेख कर अन्य एक बार फिर अपने गुजरात प्रेम का परिचय दिया। मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और उन्हें किसी एक ही राज्य की खातिर अन्य राज्यों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

ऐसा पहली बार नहीं था कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अपना गुजरात प्रेम सार्वज‌निक किया हो। मोदी ने अपनी जापान यात्रा में भी गुजरात प्रेम का कुछ ऐसा ही प्रदर्शन किया था, जिसे देश के संघात्मक ढांचे के लिहाज से बेहतर नहीं माना गया था।
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ऐसा ही रहा ‌तो बाकी देश का क्या होगा?

प्रधानमंत्री मोदी ने जापान में उद्योगपतियों की बैठक में सुजूकी के चेयमैन ओसामु सुजूकी के साथ हुई अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, 'मैंने सुजूकी के चेयरमैन को बताया कि आपने गाड़ियां बनाने का प्रोजेक्ट गुडगांव में लगा रखा है। वहां गाड़ियां बनती है और उसे बंदरगाह तक लाने के लिए हर गाड़ी पर आप हजारों रुपए खर्च करते हैं। आप अगर अपना प्रोजेक्ट गुजरात में लगाएं तो बंदरगाह तक लाने का खर्च बच जाएगा।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि सुजूकी के चेयरमैन को उनकी बात बहुत पंसद आई थी। हालांकि प्रधानमंत्री की वह बात राजनीतिक हलकों में सकारात्मक रूप से नहीं ली गई थी।

विश्लेषकों ने कहा कि केंद्र की भूमिका सभी राज्यों को विकास के समान अवसर उपलब्‍ध करना है। केंद्र सरकार का मुखिया होने के नाते प्रधानमंत्री यदि विदेशों में ऐसे भाषण दें, जिसमें एक राज्य से उद्योग को हटाकर दूसरे राज्य में ले जाने की बात कही जाए, तो देश को फायदे के बजाय नुकसान ही होगा।
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