चार साल पहले जयपुर के एक थाने में एक विवाहिता ने मामला दर्ज कराया कि उसका पति नशीला पदार्थ खिलाकर उसे गैरमर्दों के साथ सोने को मजबूर करता है। राजनीतिक हितों के लिए उसका शारीरिक शोषण किया जाता है।
हालांकि, पुलिस ने मामला झूठा बताते हुए इसमें 2012 में 'फाइनल रिपोर्ट' लगा दी। अदालत ने उसे मंजूर भी कर लिया। विवाहिता ने अदालत का दरवाजा दोबारा खटखटाया और मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। अदालत ने मामले में नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री निहाल चंद मेघवाल सहित 17 अन्य लोगों को 20 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया।
मोदी के मंत्री का नाम आते ही मामला गरमा गया और मामले की परतें खुलने लगीं। परत दर परत तस्वीर सामने आने के बाद शोषण की भयावह कहानी सामने आई। पढ़िए, शोषण और छल की पूरी कहानी। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस से)
चार साल पहले हुई थी शादी
हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर पर सिरसा जिले के अबूब शहर गांव की सुनीता (काल्पनिक नाम) की शादी चार साल पहले हुई। उन दिनों 16 साल की सुनीता अपनी 5 फुट 8 इंच की लंबाई के कारण गांव की दूसरी लड़कियों से अलग ही दिखती।
हनुमान श्रॉफ रंजित के मुताबिक, 'सुनीता तब भी बहुत हिम्मत वाली थी और अब भी है। वह साइकिल चलाकर पांच किमी स्कूल पढ़ने जाती। यह हिम्मत ही है जिसकी वजह से वह अपने पति ओमप्रकाश गोदरा, निहालचंद मेघवाल जैसों के खिलाफ मुकदमा लड़ रही है।'
गांव में लड़कियों का ब्याह जल्दी कर दिया जाता। हनुमान श्रॉफ के मुताबिक, लंबाई अधिक होने के कारण हमें ये चिंता रहती कि सुनीता का ब्याह कैसे होगा?
जल्दबाजी में करनी पड़ी थी शादी
हालांकि उसके ताऊ ने जल्द ही एक रिश्ता बताया। वह रिश्ता राजस्थान के पीलीबंगा के ओमप्रकाश का था। ताऊ ने बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलर है, देखने में भी ठीकठाक लगता है।
सुनीता की मां ने बताया कि 'हमें लगा ओमप्रकाश हमारी बेटी को अच्छी तरह से रखेगा। शादी के बाद वह खुश रहेगी।' हालांकि ऐसा हुआ नहीं। ओमप्रकाश से सुनीता का विवाह 20 दिसंबर, 2010 को हुआ। सुनीता को आज भी वो दिन बखूबी याद है।
उसने बताया, 'मेरी शादी जल्दबाजी में हुई। ताऊ ने ये रिश्ता बताया था। ओमप्रकाश अपने रिश्तेदारों के साथ मुझे देखने भी आया। लड़का खुद लड़की को देखने आए, हमारे समाज में ये नई बात थी। वह तैयार हो गया और जल्दी ही शादी करने के बात कही।'
पहले पढ़ाई करने से किया मना
ओमप्रकाश ने अपने व्यस्त होने की बात कहकर जल्दी शादी करने की बात कही। सबने उसकी बात मान ली। सुनीता ने बतायाश, '10 दिनों में हमारा ब्याह हो गया। बारात में कई लड़कियां आई थी, लेकिन वे मुझे दोबारा नहीं दिखीं। शायद उसने वे लड़कियां किराए पर ली थीं।'
जिन दिनों विवाह हुआ सुनीता 12वीं की परीक्षा देने वाली थी। ओमप्रकाश ने वादा किया वह उसकी पढ़ाई पूरी करने में मदद करेगा। शादी के बाद ओमप्रकाश सुनीता को अपने गांव पीलीबंगा ले गया।
सुनीता ने बताया, 'गांव पहुंचते ही ओम प्रकाश बोला कि मुझे पढ़ाई करने करने की कोई जरूरत नहीं।' पीलीबंगा में सुनीता को दो महीने रखा गया। दो महीने बाद ओमप्रकाश सुनीता को जयपुर लेकर गया। सुनीता की दुश्वारियां वहीं से शुरु हुईं।
'ओमप्रकाश का व्यवहार बदल चुका था'
सुनीता ने बताया, 'मैं फरवरी, 2011 में जयपुर गई। उस समय तक ओमप्रकाश का व्यवहार पूरी तरह से बदल चुका था। मैं घर पर ही रहती। मुझे ऐसा लगता कि मेरा शरीर सुन्न पड़ा हुआ है। मुझे हमेशा नींद महसूस होती।'
सुनीता के मुताबिक, 'मैंने एक दिन अपने हाथ पर गरम पानी डाल दिया, लेकिन मुझे दर्द नहीं हुआ। उस समय मुझे लगा मेरे साथ कुछ गड़बड़ हो रही है।'
सुनीता को खाना ओमप्रकाश ही परोसता था। एक दिन उसने खाना न खाने का मन बनाया। ओमप्रकाश ने खाना दिया तो उसने मौका देखकर खाना फेंक दिया और बहाना किया कि खाना खा लिया।
'मैं सोकर उठती तो बिस्तर पर नंगी होती'
उस रात ओमप्रकाश के भाई राजकुमार ने सुनीता से दुष्कर्म करने की कोशिश की। सुनीता के मुताबिक, 'जब मैंने विरोध किया, दोनों ने भाइयों ने मुझे पीटा। उस समय मैंने जाना मेरे साथ क्या किया जा रहा है। ओमप्रकाश मेरे खाने में नशीली दवाएं मिलाता था और मुझे गैर मर्दो के साथ सुलाता था।'
उसने बताया कि ओमप्रकाश अपना पीने का पानी अलग रखता। उसे कई बार शक भी हुआ लेकिन उसने कभी सवाल नहीं किया।
सुनीता ने बताया,'जब मैं सोकर उठती मेरे शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं होता। मैं बिस्तर पर नंगी होती। ऐसा लगता मेरे साथ कुछ किया गया है। मेरे जहन में किसी मर्द की, किसी शरीर की धुंधली परछाई रहती लेकिन मुझे कुछ याद नहीं रहता।'
हर रात किसी गैर मर्द को परोस देता।
दरअसल कई दिनों से सुनीता का शारीरिक शोषण किया जा रहा था। ओमप्रकाश हर रात उसे किसी गैर मर्द को परोस देता।
सुनीता को जब अपने साथ हो रहे दुराचार का अंदाजा हुआ, तब ओमप्रकाश ने उसकी दोनों बहनों का अपहरण करने की धमकी दी।
सुनीता ने बताया कि उस दिन के बाद उसे उस फ्लैट के एक कमरे में बंद कर दिया जाता, जहां वह रुकी हुई थी। ओमप्रकाश हर दिन उसकी पिटाई करता। शारीरिक शोषण का सिलसिला यूं ही चलता रहा।
कई बार निहाल ने किया शोषण
सुनीता ने बताया कि ओमप्रकाश घर से बाहर जाता तो उसे कमरे बंद कर जाता। कमरे बंद कर वह दरवाजे के ताले पर माचिस की डिबिया रख देता। ओमप्रकाश वापस लौटता और वह डिबिया नीचे गिरी होती तो मान लेता कि सुनीता ने भागने की कोशिश की और उसे पीटना शुरु कर देता।
सुनीता के मुताबिक, ओमप्रकाश उसके पास कई मर्दों को लेकर आता। निहालचंद भी उसी में से एक थे। ओमप्रकाश कई बार उन्हें सुनीता के पास ले गया। निहालचंद इस मामले में एक बार बरी हो चुके हैं। लेकिन मामला दोबारा उठने के बाद जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं सच्चाई क्या है।