मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर अखिलेश सरकार मुश्किल में फंसती नजर आ रही है। नाराज मुस्लिम संगठनों ने सपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
देश के जाने माने दर्जनों संगठनों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर अखिलेश सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है।
दंगे को राजनीतिक साजिश करार देते हुए इन संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार ने हिंसा रोकने के लिए पर्याप्त और ईमानदार प्रयास नहीं किए।
दो दिन पहले ही कई मुस्लिम संगठनों की अगुवाई करने वाले संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत (एआईएमएमएम) ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को पत्र लिख कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी।
बुधवार को एआईएमएमएम, जमीयत उलमा ए हिंद, जमात ए इस्लामी हिंद, मुस्लिम पोलटिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, मजलिस उलेमा ए हिंद, जमीयत अहले हदीस के नेताओं ने पीएम को पत्र लिख कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग के साथ-साथ मुलाकात का समय भी मांगा है।
जमीयत उलमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दंगे को विपक्षी साजिश बता कर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
आखिरकार सुरक्षा देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। फिर सपा सरकार के छोटे कार्यकाल में हुए सौ से अधिक सांप्रदायिक दंगों ने यह साफ संकेत दिया है कि राज्य में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की हिंसा न हो, इसके लिए राज्य सरकार को बर्खास्त किया जाना जरूरी है।
एआईएमएमएम के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान ने कहा कि कानून व्यवस्था बरकरार न रखने के कारण अल्पसंख्यक परिवार बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। तमाम दावों के बावजूद हिंसा बदस्तूर जारी है।
उन्होंने कहा कि चूंकि राज्य सरकार अल्पसंख्यकों की हिफाजत नहीं कर पा रही है, इसलिए राज्य में तत्काल राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कासिम रसूल इलियास ने भी राज्य सरकार की तीखी आलोचना करते हुए राष्ट्रपति शासन की मांग की।