उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में इस महीने हुए साम्प्रदायिक दंगो के दौरान लापता दर्जनों लोगों का अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है।
इनमें से कुछ ही लोगों की गुमशुदगी दर्ज है जबकि बाकी लोग थानो में गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं। इस हिंसा के दौरान गुमशुदा लोगों की रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पा रही है।
परिवार के लोग आशंकित है कि कहीं लापता परिजन दंगाईयों के हत्थे तो नहीं चढ़ गये है। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस इन मामलों को बहुत हल्के से ले रही है।
एक भी मामले में पुलिस ने तलाश करना तो दूर परिजनों से बातचीत करना भी मुनासिब नहीं समझा। थानों ही नहीं परिवार वालों का जमावड़ा जेल पर भी लगा रहता है लेकिन अधिकतर मामलों में लोगों को मायूसी ही हाथ लग रही है।
इनमें से ज्यादातर गुमशुदगी सात सितंबर की शाम से है, जब कर्फ्यू लगाने का ऐलान हो गया था। गुमशुदा लोगों में से गायब अधिकतर कम उम्र के युवा हैं। थानों के रिकार्ड खंगाले गए तो अधिकतर थानो में गुमशुदगी शून्य मिली।
फिर पैदा हुआ तनाव
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में फिर एक लडकी के साथ हुई छेड़खानी की घटना से इलाके में तनाव पैदा हो गया। घंटों की जद्दोजेहद के बाद हुई पंचायत में आरोपी युवक के माफी मांगने एवं परिजनों द्वारा आरोपी युवक को पांच जूते मारे जाने के बाद विवाद शांत हो सका।
मुजफफरनगर के जानसठ कोतवाली के गांव कवाल में 27 अगस्त को हुई घटना से भी शामली पुलिस ने कोई सीख नहीं ली अपितु पूरे मामले में मूक दर्शक बनी रही। ऐसी ही घटना के बाद मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ था जो शामली तक फैल गया था।