मुजफ्फरनगर राहत शिविरों के रह रहे लोगों को भिखारी कहने पर इलाहाबाद के उलेमा ने समाजवादी पार्टी नेता अतीक अहमद का कड़ा विरोध किया है।
उलेमा ने कहा कि राहत शिविरों में रह रहे लोग पहले ही तकलीफ में हैं, इस तरह का गैरजिम्मेदाराना बयान देकर उन्हें और तकलीफ न पहुंचाया जाए।
उलेमा के एक बड़े संगठन बज्म पैगामे वहदानियत के अध्यक्ष मुफ्ती महमूद हसन गाजी ने भी प्रदेश सरकार के साथ ही उन तमाम नेताओं को आड़े हाथों लिया है जो मुजफ्फरनगर दंगा मामले में बेतुके बयान दे रहे हैं।
राहत शिविरों को लेकर नेता दे रहे बेतुके बयान
महमूद हसन ने कहा है कि जिन्हें दंगा पीड़ितों की हकीकत जाननी है, वह शामली, बागपत और फुगाना का दौरा करें। सियासी नफे की खातिर कौम को भिखारी कहना किसी भी सूरत में जायज नहीं है।
मदरसा एसोसिएशन से जुड़े मौलाना अमजद रशीद ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि जो लोग अब तक कौम के रहम-ओ-करम पर विधायक और सांसद बनते आए हैं, वे अब उन्हें भिखारी लग रहे हैं। लोकसभा चुनाव करीब है, वे इन्हीं भिखारियों के पास वोट मांगने जाएंगे।
इमाम वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य मौलाना फैजान ने भी अतीक अहमद के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि दंगा पीड़ित किसी भी कौम के हों, उन्हें मरहम की जरूरत है। अगर मरहम नहीं लगा सकते तो कम से कम तकलीफ तो न पहुंचाए।
पहले भी निशाने पर आ चुके हैं सपा नेता
मुजफ्फरनगर राहत शिविरों को लेकर दिए बयानों के कारण समाजवादी पार्टी के नेताओं की पहले भी आलोचना हुई है।
समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कुछ दिनों पहले राहत शिविरों में रह रहे लोगों को कांग्रेस और भाजपा का कार्यकर्ता बताया था।
उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने के लिए राहत शिविरों में कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता रह रहे हैं। मुलायम के बयान की राजनीतिक दलों के साथ मानवाधिकार संगठनों ने भी आलोचना की थी।