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आज एक होगा जनता परिवार, मुलायम करेंगे ऐलान

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जनता परिवार में शामिल दलों के विलय पर बीते कुछ समय से जारी कयासबाजी बुधवार को खत्म हो जाएगी। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव जनता परिवार के छह दलों के नेताओं के साथ बैठक कर विलय की औपचारिक घोषणा करेंगे।
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इन दलों ने पहले ही सपा के चुनाव निशान साइकिल को नई पार्टी का चुनाव निशान बनाने और नई पार्टी का नाम समाजवादी जनता दल रखने पर सहमति दे दी है। जदयू के महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि बैठक में सभी छह दलों के वरिष्ठ नेता शिरकत करेंगे।

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने जनता परिवार के विलय की मुहिम शुरू की थी। इस मुहिम को तब पहली सफलता मिली जब बिहार की राजनीति के धुरंधर विरोधी जदयू और राजद ने विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव पूर्व गठबंधन पर सहमति दी।
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समाजवादी जनता दल होगा नाम

इस गठबंधन को मिली सफलता के बाद सपा, इनेलो, सजपा और जदएस ने भी विलय के सवाल पर गंभीरता से मंथन शुरू किया। त्यागी ने अमर उजाला को बताया कि बुधवार को सपा प्रमुख के निवास पर विलय की घोषणा के लिए सभी छह दलों की बैठक होगी।

जदयू सूत्रों ने बताया कि चुनाव निशान सपा का साइकिल होगा, इस पर पूर्ण सहमति है। हालांकि, नाम को लेकर थोड़ा असमंजस जरूर है।

दलों के कुछ नेता चाहते हैं इसका नाम दिवंगत पीएम चंद्रशेखर की पार्टी के नाम से ही समाजवादी जनता पार्टी रखा जाए जबकि कुछ नेताओं का कहना है कि समाजवादी जनता दल के नाम में सभी छह दलों की हिस्सेदारी दिखेगी।

उल्लेखनीय है कि इन दलों में सपा, जदयू, राजद, जदएस, इनेलो और सजपा शामिल हैं। बुधवार की बैठक में मुलायम और शरद के अतिरिक्त सपा के रामगोपाल यादव, राजद के लालू प्रसाद, जदयू के नीतीश कुमार, केसी त्यागी, जदएस के एचडी देवगौड़ा, इनेलो के दुष्यंत चौटाला और सजपा के कमल मोरारका उपस्थित रहेंगे।
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साइकिल होगा चुनाव निशान

विलय के बाद जनता परिवार की संसद में ताकत बढ़ेगी। दरअसल, लोकसभा में अलग-अलग बैठने के कारण ये सभी दल अपनी ठोस उपस्थिति दर्ज नहीं करा पा रहे थे। अब विलय के बाद जहां लोकसभा में जनता परिवार के सदस्यों की संख्या 15 हो जाएगी, वहीं राज्यसभा में यह संख्या 30 होगी।

मोदी के डर से हुए एकजुट
जनता परिवार का कुनबा दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी के भय से एकजुट हुआ। लोकसभा चुनाव में अलग-अलग ताल ठोकने के कारण हुई दुर्गति के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव इस परिवार के लिए जीवन मरन का सवाल बन गया है।

जदयू सूत्रों का कहना था कि शुरू में सपा नेताओं के मन में विलय को लेकर थोड़ी हिचकिचाहट थी। मगर बाद में विलय से मिलने वाली मानसिक ताकत के मद्देनजर सपा भी राजी हो गई।
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