सौ दिन रोजगार देने वाली केंद्रीय योजना मनरेगा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। योजना से रोजगार मिलना तो दूर उल्टे किसान और मजदूरों की परेशानी बढ़ गई है। गांवों में खेती-किसानी के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। यह कहना है सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का।
उन्होंने लोकसभा में बुधवार को कहा कि वास्तव में मनरेगा से कहीं कोई काम नहीं हो रहा है। मगर इसके पैसे से अफसर जरूर मालामाल हो रहे हैं। सपा मुखिया ने इसमें भ्रष्टाचार को देखते हुए किसानों के हित में इस योजना को तत्काल बंद करने की मांग भी की।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में शिरकत करते हुए मुलायम ने कहा कि मनरेगा के पैसे को राज्यों को दिया जाना चाहिए, ताकि विकास कार्य हो सके। उन्होंने बताया कि मनरेगा से किसी गांव में कोई काम नहीं हुआ है। गरीबों को रोजगार देने के नाम पर अफसर पैसे की बंदरबांट करने में लगे हुए हैं।
उन्होंने राजीव गांधी की बात का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र से जो पैसा जाता है उसका केवल 13 से 14 फीसदी ही बचता है, शेष 86 फीसदी पैसा बर्बाद हो जाता है। मनरेगा से यह बर्बादी और बढ़ी है। इस बर्बादी में अफसरों के साथ कुछ जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं।
सपा मुखिया ने कहा कि सरकार मनरेगा पर सालाना 40,000 करोड़ खर्च कर रही है। इतना पैसा यदि राज्यों को सीधे दिया जाए तो वहां की तस्वीर बदल सकती है।