वीवीआईपी अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदेबाजी पर पर्दा डालने का आरोप झेल रही सरकार ने सरकार ने इसकी जांच के लिए तीस सदस्यों वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की घोषणा कर दी है। इस सौदे में हुई कथित दलाली पर बुधवार को राज्यसभा में गरमागरम बहस के बाद सरकार ने मामले की जांच जेपीसी से कराने का प्रस्ताव पेश किया।
भाजपा ने संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ की ओर से पेश इस प्रस्ताव का तीखा विरोध करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। वैसे इस घूसकांड पर विपक्षी दलों ने ही नहीं यूपीए के सहयोगियों ने भी सरकार को जमकर घेरा।
भाजपा के साथ तृणमूल कांग्रेस, बीजद और डीएमके भी प्रस्ताव के विरोध में सदन से बाहर चले गए। लेकिन एक बार फिर बसपा और सपा ने इस प्रस्ताव का समर्थन कर सरकार की परोक्ष रूप से मदद की। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह पूरे मामले को उलझाने के मकसद से जांच जेपीसी को सौंपना चाहती है।
वाकआउट करने वाले विपक्षी दलों ने सीबीआई की नीयत पर भी शक जताया और एजेंसी की जांच को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की। जेपीसी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।
प्रस्ताव से पहले इस मामले पर बहस के जवाब में रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि वह इस घोटाले से शर्मिंदा हैं। एंटनी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार हर घोटाले पर शर्मिंदगी महसूस करती है। वह इस घोटाले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सीबीआई के अलावा हर तरीके से मामले की तह पहुंचने की कोशिश की जा रही है। रक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि टैक्स देने वाली जनता का पैसा बरबाद नहीं जाएगा।
इससे पहले इस मुद्दे पर बहस शुरू करते हुए भाजपा नेता प्रकाश जावडेकर ने सरकार पर जांच में जानबूझ कर देर करने का आरोप लगाते हुए सौदे के मनीट्रेल की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि देश उस परिवार के बारे में जानना चाहता है कि जिसका जिक्र इटली सरकार की जांच में सामने आया है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने एंटनी के जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि उनका जवाब लाचारी में दिया गया है। सरकार जानबूझ कर देर कर घूस लेने वालों को बचने का पूरा मौका दे रही है। जेटली ने कहा कि जेपीसी का गठन भी मामले को उलझाने के लिए ही किया गया है।
सपा-बसपा ने फिर दिया सरकार का साथ
बसपा और सपा ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे की जांच के लिए जेपीसी के गठन का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव के विरोध में भाजपा, डीएमके, बीजू जनता दल और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने राज्यसभा से वाकआउट कर दिया था।
हालांकि बसपा अध्यक्ष मायावती ने इस मामले पर बहस के दौरान यूपीए को घोटालों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जनता के बीच सरकार की साख बहुत खराब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में संसद का ज्यादातर समय घोटालों पर शोरशराबे, हंगामे और बहस में बर्बाद हो गया। जिससे लोगों की समस्याओं से जुड़े मामलों पर फैसला नहीं लिया जा सका है। अगर सरकार घोटालों के प्रति संजीदा होती तो यह हालत नहीं होती।
सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने भी सीबीआई पर सवाल खड़े करते हुए जांच की जिम्मेदारी जेपीसी को देने की मांग की। अग्रवाल ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान एक के बाद एक हो रहे घोटालों से जनता का सरकार पर भरोसा उठता जा रहा है।