लोकसभा चुनाव में सपा की करारी हार पर आखिरकार बृहस्पतिवार को मुलायम सिंह यादव का दर्द छलक पड़ा।
बजट पर चर्चा के दौरान बोलने के लिए एक नहीं तीन बार खड़े हुए नेताजी को जब कांग्रेसी सदस्यों ने बोलने नहीं दिया तो उन्होंने कहा, 'आपको बचाते-बचाते हम हार गए, यही सच्चाई है।'
कांग्रेसियों ने एससी-एसटी बिल पर फिर भी हंगामा जारी रखा तो नेताजी के समर्थन में उनके भतीजे धर्मेंद्र यादव कूद पड़े। उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस के 44 सदस्य हैं उनमें आगे से कोई बोल कर दिखा दे।
इस तीखी नोकझोंक पर लोकसभा में वह दुर्लभ नजारा देखने को मिला जब नेताजी के समर्थन में भाजपा सदस्यों ने मेजें थपथपाईं। अंत में जब नेताजी को बोलने दिया गया तो उन्होंने कांग्रेस को धन्यवाद दिया और कहा आप हमारा साथ देंगे तभी हम आपका देंगे।
तीन बार खड़े हुए, पर नहीं बोल पाए मुलायम
दरअसल प्रश्नकाल के बाद जब बजट पर चर्चा शुरू हुई तो स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मुलायम सिंह यादव को बोलने के लिए कहा, लेकिन इस दौरान कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने वेद प्रताप वैदिक की हाफिज सईद से मुलाकात का मामला उठा दिया।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के राज्यसभा में होने के चलते कांग्रेसियों को जवाब नहीं मिला तो वे हंगामा करने लगे, लेकिन सदन की कार्यवाही चलती रही।
हंगामे के बीच स्पीकर ने मुलायम सिंह को समय दिया तो उन्होंने कहा कि इतने शोरगुल के बीच वे कैसे बोलें? इसके बाद वे बैठ गए। इसी दौरान सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने एससी-एसटी बिल रखा, जिसे स्पीकर ने स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया।
इसी दौरान सुषमा स्वराज सदन में आईं और कांग्रेसियों के सवाल का जवाब दिया। तभी कांग्रेसी सदस्यों को पता लगा कि महत्वपूर्ण बिल को स्टैडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया है। अब उन्होंने इस पर हंगामा शुरू कर दिया।
'अब कोई बोल कर तो दिखाए'
स्पीकर ने फिर नेताजी को बोलने को कहा तो उनका फिर यही जवाब था कैसे बोलें? वह दूसरी बार बैठ गए। लेकिन इससे पहले कांग्रेस को समर्थन पर लोकसभा चुनाव में हार मिलने की बात कहकर उन्होंने अपना दर्द बयां कर दिया।
इसी दौरान हंगामे के बीच धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेसी सदस्यों को खुली चुनौती दे डाली कि वह उनके बोलने के दौरान व्यवधान डालेंगे। खड़गे भी मुलायम के पास आए और उन्हें समझाने की कोशिश की।
स्थिति यह बनी कि मुलायम सिंह तीन बार खड़े हुए। तीनों बार उन्होंने कहा कि यह अच्छे नहीं, बुरे दिनों की शुरूआत है और तीनों बार उन्हें बैठना पड़ा। तकरीबन 40 मिनट के व्यवधान के बाद उन्हें बोलने का मौका मिला।