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मोदी वीजा विवाद: सांसदों के हस्ताक्षर असली

Mon, 29 Jul 2013 01:19 AM IST
नई दिल्ली/वाशिंगटन/एजेंसी
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नरेंद्र मोदी को वीजा नहीं देने के लिए भारतीय सांसदों द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को लिखे गए खत के विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।
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कैलिफोर्निया में फोरेंसिक दस्तावेजों की जांच करने वाले विशेषज्ञ ने साफ कहा है कि पत्र पर सांसदों के हस्ताक्षर वास्तविक एवं प्रमाणिक हैं न कि ‘कट एंड पेस्ट’, जैसा कि दावा किया गया था।

इससे पहले 19 सांसदों ने पत्र पर अपने हस्ताक्षर न होने का दावा किया था। मोदी विरोधी इस मुहिम के खिलाफ भाजपा ने आक्रामक रुख अपना लिया था।

मोदी समर्थक तो फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराने की मांग करने लगे थे, पर हस्ताक्षर का सच सामने आने के बाद एकबार फिर सियासी माहौल गरमा गया है।
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कैटरीना की वजह से नहीं मिल रहा मोदी को वीजा

पत्र की फोरेंसिक जांच के बाद रिपोर्ट में कहा गया, ‘फोरेंसिक जांच के स्वीकार्य सिद्धांतों एवं तरीकों का इस्तेमाल करते हुए पाया गया है कि क्यू1-क्यू3 दस्तावेज (तीन पन्नों का राज्यसभा सांसदों का पत्र) एकबार में तैयार किया गया। पत्र पर इंक पेन से किए गए हस्ताक्षर वास्तविक हैं।’

मोदी के खिलाफ ओबामा को लिखे पत्र में फर्जी हस्ताक्षर

लोकसभा सदस्यों द्वारा भेजे गए पत्र में भी यही निष्कर्ष सामने आया। राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों द्वारा पिछले साल 26 नवंबर और पांच दिसंबर को ओबामा को लिखे गए दो पत्रों को दोबारा 21 जुलाई को व्हाइट हाउस फैक्स किया गया।

कैलिफोर्निया में फोरेंसिक डॉक्यूमेंट एक्जामिनर नानेट एम बार्तो ने पत्रों की हैंड राइटिंग (लेखन) की जांच की। सीपीआई (एम) के नेता सीताराम येचुरी, एमपी अच्युतन (सीपीआई) और डीएमके के केपी रामलिंगम आदि सांसदों द्वारा पत्र पर हस्ताक्षर करने से इंकार करने के बाद ‘कोलीशन अगेंस्ट जीनोसाइट’ (सीएजी) ने जांच करने का अनुरोध किया था।

मोदी को अमेरिका वीजा न मिले, इसके लिए यह संगठन अभियान छेड़े हुए है। यह करीब 40 भारतीय अमेरिकी संगठनों का बड़ा गठबंधन है।

65 सांसदों ने भेजी थी चिट्ठी
12 दलों के 65 सांसदों ने पत्र फैक्स कर ओबामा से अनुरोध किया था कि मोदी को अमेरिकी वीजा देने संबंधी मौजूदा नीति जारी रखी जाए। एक पत्र पर राज्यसभा के 25 सदस्यों तथा दूसरे पर लोकसभा के 40 सदस्यों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।

मोदी विरोधियों की कोशिश है कि इस मुद्दे की आड़ में आगामी लोकसभा चुनाव की बहस हर हाल में सांप्रदायिक मुद्दों पर केंद्रित की जाए। कभी बुर्का तो कभी पिल्ला या राष्ट्रवादी हिंदू जैसे मोदी के बयानों पर हंगामा खड़ा किया जाता रहा है।
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फोरेंसिक जांच से साबित हो गया है कि कागज वाली प्रति या इलेक्ट्रानिक वर्जन किसी में भी कट एंड पेस्ट जैसा कुछ नहीं हुआ। हर एक हस्ताक्षर अलग है।--राजा स्वामी, मोदी विरोधी गठबंधन (सीएजी) के प्रवक्ता
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