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मोदी की रैली: कटवाई किसानों की खड़ी फसल?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते मध्य प्रदेश के दौरे पर जा रहे हैं। जहां उन्हें एक किसान रैली को संबोधित करना है। सीहोर में होने वाली इस रैली ने वहां के कुछ किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।
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हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक सीहोर में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के लिए प्रशासन ने जिस जगह का चुनाव किया है, उसकी जद में कुछ किसानों के खेत भी आ गए हैं। जिसमें अभी तक फसलों की कटाई नहीं हुई है।

बावजूद इसके प्रशासन ने रैली की जगह के लिए कुछ किसानों को खड़ी फसल काटने का आदेश सुना दिया है। प्रशासन के इस रवैये से ये किसान खासे परेशान हैं। 24 वर्षीय किसान कपिल परमार ने कहा कि अब मेरे समझ नहीं आ रहा कि आखिर अब मैं क्या करूं?
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खड़ी फसल कटने के आदेश से किसान हुए परेशान

कपिल की तीन एकड़ जमीन रैली के लिए चुनी गई है। जिसमें लगी फसल अभी भी पकी नहीं है, लेकिन प्रशासन के डेडलाइन की वजह से उन्हें अधपकी फसल काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। कपिल ने पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री चाहते हैं कि मैं आत्महत्या कर लूं? आखिर अधपकी फसल के लिए मुझे बेहद बहुत कम पैसे मिलेंगे। अगर ऐसा हुआ तो मुझ पर कर्ज का बोझ बढ़ जाएगा। ऐसे में मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।

कपिल परमार ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को गांव की मुखिया के समक्ष भी रखा। उनसे इस मामले में सहयोग मांगा। लेकिन गांव की महिला प्रधान ने इस मामले में कुछ भी करने में अक्षमता जाहिर किया है।

कपिल परमार के मुताबिक चार दिन पहले तहसीलदार और पटवारी उनसे मिलने आए, उन्होंने मुझसे एक पेपर पर हस्ताक्षर कराया, जिसमें ये आश्वस्त किया गया था कि मैं मंगलवार तक अपने खेत में खड़ी फसल कटवा दूंगा। इसके साथ-साथ कंटीले तार से घिरा खंभा भी हटवाया जाएगा जो जानवरों को खेत में घुसने से रोकने के लिए लगाया गया था।
(तस्वीर: साभार हिंन्दुस्तान टाइम्स)
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18 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी की रैली

किसानों से इस बाबत बताया गया कि उनकी जमीन 18 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के लिए ली गई है। इस जमीन पर बैठने के साथ-साथ रैली में आने वाली गाड़ियों की पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक रैली में करीब एक लाख किसान शामिल होंगे।

कपिल परमार के खेतों से कुछ दूर पर एक और किसान प्रेम नारायण का खेत है। वह और उनके तीन भाईयों की भी जमीनें रैली क्षेत्र में आ रही है। उन्हें भी अपनी खड़ी फसलों को कटवाने के लिए मजबूर होना पड़ा। नारायण ने बताया कि उन्होंने निजी ऋणदाता से पैसे लिए थे, जिसे लौटाने के लिए 3 लाख का बैंक लोन लिया था। अब खड़ी फसल कटने से इस ऋण को लौटाने में खासी मुश्किलें आ सकती हैं।

हालांकि इस पूरे विवाद पर जब सीहोर के जिला कलेक्टर सुदाम खड़े से बात की गई तो उन्होंने किसानों के आरोपों को खारिज कर दिया। उनके मुताबिक किसी भी किसान की खड़ी फसल को काटा नहीं गया है और रैली क्षेत्र की अधिकतर जमीन सरकारी है। कुछ लोगों की निजी जमीन उनकी रजामंदी से ली गई है।
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