कर्नाटक के हम्पी में स्थित शिलाखंड पर लिखी गई प्राचीन लिपि को डॉ. मोतीरावण कंगाली ने पढ़ने में सफलता हासिल करने का दावा किया है। इन्होंने इसे गोंडी भाषा के माध्यम से पढ़ा है। हड़प्पन और हड़प्पन जैसी चित्रलिपियों को पढ़ने के लिए डॉ. मोतीरावण कंगाली जी ने एक फॉर्मूला भी दिया है।
इस फॉर्मूले के अनुसार सबसे पहले यह पता करना जरूरी होता है कि हर एक चिह्न किस बात का प्रतीक है। इसके बाद यह खोजना होता है कि आखिर द्रविड़ पूर्व भाषा में उस चिह्न के पर्यायवाची शब्द का मतलब क्या है। यह पता चल जाने के बाद उसके वास्तविक अर्थ और शाब्दिक अर्थ को निश्चित कर उसका सही मतलब निकाला जा सकता है।
इस फॉर्मूले का प्रयोग करके हड़प्पन चित्रलिपि और हप्पी स्थित प्राचीन चित्रलिपि को पढ़ा जा सकता है। मोतीरावण कंगाली ने इस लिपि को पढ़कर दुनिया के भाषाविद, इतिहासविद, भूगोलविद, अध्ययनकर्ता और खोजकर्ताओं को एक नई दिशा दी है।