मुंबई में हाल ही में हुए टैटू महोत्सव में देश विदेश से आए कई कलाकारों से टैटू बनावाने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।
वैसे भारत के लिए टैटू नई बात नहीं है। पुराने समय में लोगों के नाम, उनके जन्म की तारीख बच्चे के जन्म के समय ही उनके हाथ पर लिख दी जाती थी। लेकिन पश्चिमी संस्कृति के असर के बाद भारत के शहरों में टैटू की लोकप्रियता बढ़ी है।
बीते चार पांच वर्षो में ना सिर्फ टैटू बनवाने वालों की तादाद बढ़ी है बल्कि टैटू कलाकारों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
नौ साल से इस व्यवसाय में लगे टैटू कलाकार रोशन कहते हैं, "जब मैंने शुरुआत की थी तो लोगों का नजरिया इस कला को लेकर बेहद संकुचित हुआ करता था। लोग कहते थे क्या गांव से आया है!"
वहीं टैटू कलाकार अर्चना का कहना है, "जब मैंने बारहवीं में अपने शरीर पर टैटू बनवाया था तब मुझे तो लोग दूसरे ग्रह के प्राणी की तरह देखते थे। हमारे इस व्यवसाय को सम्मान नहीं दिया जाता था।"
सभी टैटू कलाकार खुद को आर्टिस्ट मानते हैं। फिल्मों में कलाकारों के टैटू देखकर लोगों में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है और इससे जुडी हीन भावना कम हो रही है।