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देश छोड़ विदेश में बसने वाले भारतीय सबसे अधिक

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विश्व की कुल जनसंख्या का 3.3 फीसदी हिस्सा अपने देश को छोड़कर दूसरे देशों में रहता है। करीब 24.4 करोड़ लोगों की इस संख्या में नौकरी-पेशा करने वाले, युद्ध के हालातों से दूसरे देशों में पनाह ले रहे प्रवासी और अन्य लोग शामिल हैं। इस संख्या में तकरीबन 1.6 करोड़ लोगों की संख्या के साथ भारत सबसे ऊपर है।
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दुनिया के अलग-अलग कोनों में सबसे ज्यादा भारतीय बसे हैं। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो अपने देश को छोड़कर दूसरे देशों में शरण ले रहे या फिर रह रहे लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। जिससे इन्हें शरण देने वाले देशों के सामने आर्थिक व सामाजिक चुनौतियां पेश आ रही हैं।
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भारतीय प्रवासी यूरोपीय देशों के लिए लाभकारी

सबसे ज्यादा भारतीय दुनिया के विभिन्न कोनों में फैले हुए हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर मेक्सिको खड़ा है, जिसकी 1.2 करोड़ जनसंख्या विदेशों में रह रही है और अधिकतर लोग अमेरिका में रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक प्रवासियों का ये जमावड़ा मुख्य तौर पर शीर्ष 20 देशों में है।

2015 के आंकड़ों पर गौर करें, तो इस साल प्रवासी सबसे ज्यादा अमेरिका, जर्मनी, रूस और सऊदी अरब पहुंचे। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के इन आंकड़ों में वैध और अवैध तरीके से पहुंचे प्रवासियों के बीच फर्क नहीं किया गया है। भारत के शीर्ष होने के पीछे एक कारण यह भी है  कि सबसे युवा जनसंख्या एशियाई देशों में है।

सबसे ज्यादा युवा ही दूसरे देशों में रोजगार की खोज में पहुंच रहे हैं। भारतीय समेत अन्य देशों से विदेशों में पहुंच रहे प्रवासियों से सबसे ज्यादा फायदा उन यूरोपीय देशों को हो रहा है, जिनकी जनसंख्या तेजी से बूढ़ी हो रही है।

भारत समेत अन्य एशियाई देशों की जनसंख्या जवान है, जो यहां की अर्थव्यवस्था में मानवीय श्रम की जरूरत को पूरा करती है। ऐसे में ये यूरोपीय देश एशियाई देशों से आने वाले प्रवासियों का खुले दिल से स्वागत करते हैं।  
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